आरोग्य मेले में डॉक्टर गायब, फार्मासिस्ट के भरोसे मरीज!
देवरिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री आरोग्य मेला आयोजित कर रही है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महेन क्षेत्र के नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पैना में रविवार को आयोजित आरोग्य मेला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आईना बन गया। यहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के समय से पहले अस्पताल से चले जाने के बाद मरीजों की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट के भरोसे दिखाई दी।
बताया गया कि आरोग्य मेले में ड्यूटी पर तैनात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आकांक्षा निर्धारित समय पूरा होने से पहले ही अस्पताल से चली गईं। जब फार्मासिस्ट से डॉक्टर की गैरमौजूदगी के बारे में जानकारी ली गई तो बताया गया कि डॉक्टर बाजार करने के लिए देवरिया चली गई हैं।
सवाल यह है कि जिस दिन सरकार की ओर से विशेष रूप से ग्रामीण मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए आरोग्य मेला लगाया गया था, उसी दिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर समय से पहले अस्पताल छोड़कर चली जाएं तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी है? डॉक्टर की गैरमौजूदगी में फार्मासिस्ट द्वारा मरीजों को देखने और दवा देने की स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महेन प्रभारी डॉ. मिरनाल की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में जब महेन के प्रभारी डॉ. मिरनाल से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि डॉ. आकांक्षा की रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में ड्यूटी थी और वह निर्धारित समय से पहले चली गई थीं। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित डॉक्टर से जानकारी ली जाएगी।
लेकिन यहां सवाल सिर्फ डॉक्टर के समय से पहले चले जाने का नहीं है। जब स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. मिरनाल के ऊपर अस्पताल की व्यवस्था और ड्यूटी की निगरानी की जिम्मेदारी है, तो फिर आरोग्य मेले जैसे महत्वपूर्ण दिन डॉक्टर के समय से पहले चले जाने पर निगरानी तंत्र कहां था? क्या डॉक्टरों की ड्यूटी की निगरानी केवल कागजों में ही होती है?
और तो और, प्रभारी डॉ. मिरनाल ने खुद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महेन की बदहाल व्यवस्थाओं की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर और बाउंड्री के अंदर बाथरूम तथा लाइट की समुचित व्यवस्था तक नहीं है। प्रभारी के मुताबिक इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी जा चुकी है।
आरोग्य मेला या खानापूर्ति?
एक तरफ सरकार गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए आरोग्य मेले पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ड्यूटी के समय डॉक्टर का गायब होना और फार्मासिस्ट के भरोसे मरीजों का इलाज होना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले को महज “जानकारी लेकर छोड़ देने” तक सीमित रखते हैं या ड्यूटी से समय से पहले गायब रहने वाली डॉक्टर और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कोई ठोस कार्रवाई करते हैं।























































Leave a comment