7 महीने की गर्भवती वी. अनीता ने रचा इतिहास, ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल
केरल। जज्बे, जुनून और हौसले की कोई सीमा नहीं होती—इस बात को चेन्नई की रहने वाली वी. अनीता ने अपनी शानदार उपलब्धि से साबित कर दिया है। सात महीने की गर्भवती अनीता ने ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सबको हैरान कर दिया। केरल में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देशभर से करीब 1500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
तीसरी कक्षा से शुरू किया कराटे का सफर
वी. अनीता ने महज तीसरी कक्षा से कराटे सीखना शुरू किया था। बचपन में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया। वर्षों की मेहनत, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बना दिया।
कराटे के साथ-साथ अनीता ने अपने करियर में कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया। उन्होंने L&T जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी की, लेकिन उनके भीतर कराटे के प्रति जुनून लगातार बना रहा।
कॉरपोरेट नौकरी छोड़ी, कराटे को बनाया प्रोफेशन
एक समय ऐसा आया जब अनीता ने कॉरपोरेट की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अपने जुनून को ही अपना पेशा बनाने का निर्णय किया और कराटे को बतौर प्रोफेशन अपना लिया।
इसके बाद उनका पूरा ध्यान प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और कराटे को आगे बढ़ाने पर रहा। आज उनकी उपलब्धि उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।
सात महीने की प्रेग्नेंसी में भी नहीं छोड़ा जुनून
अनीता की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह गोल्ड मेडल सात महीने की गर्भावस्था के दौरान जीता। हालांकि गर्भावस्था में किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि चिकित्सकीय सलाह और व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुसार ही की जानी चाहिए, लेकिन अनीता की उपलब्धि उनके समर्पण और लंबे प्रशिक्षण की कहानी जरूर बताती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे करीब 1500 खिलाड़ियों के बीच गोल्ड मेडल हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
अनीता की कहानी देती है बड़ा संदेश
वी. अनीता की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल की कहानी नहीं है। यह हिम्मत, निरंतरता और अपने सपने को प्राथमिकता देने की कहानी है। तीसरी कक्षा में शुरू हुआ कराटे का सफर, बड़ी कंपनी की नौकरी और फिर कॉरपोरेट करियर छोड़कर खेल को अपना प्रोफेशन बनाना—अनीता ने अपने फैसलों से साबित किया कि अगर जुनून सच्चा हो तो मंजिल हासिल करने के रास्ते निकाले जा सकते हैं।
सात महीने की गर्भवती अनीता का यह गोल्ड मेडल आज देशभर में महिला शक्ति, खेल भावना और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गया है। 🥇🇮🇳






















































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