“8 हाई कोर्ट में बड़ा फेरबदल! देश को मिले नए मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने दी नियुक्तियों को मंजूरी—देखिए किस हाई कोर्ट की कमान किस जस्टिस को मिली”
• 8 हाई कोर्ट को मिले नए मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने दी नियुक्तियों को मंजूरी
नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026। देश की न्यायपालिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने देश के आठ उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति अधिसूचित कर दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की जानकारी साझा की। इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अगस्त में की थी।
⚖️ किस हाई कोर्ट को मिला कौन-सा मुख्य न्यायाधीश?
| हाई कोर्ट | नए मुख्य न्यायाधीश |
|---|---|
| पटना हाई कोर्ट | जस्टिस वी. कामेश्वर राव |
| कलकत्ता हाई कोर्ट | जस्टिस रवींद्र वी. घुगे |
| राजस्थान हाई कोर्ट | जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल |
| बॉम्बे हाई कोर्ट | जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी |
| पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट | जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा |
| छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट | जस्टिस कृष्ण राम महापात्र |
| मध्य प्रदेश हाई कोर्ट | जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे |
| जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट | जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी |
इन आठ नियुक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना केंद्र सरकार ने 5 सितंबर 2026 को जारी की। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इससे पहले 9 अगस्त और 31 अगस्त 2026 को संबंधित सिफारिशें की थीं।
🔹 इलाहाबाद हाई कोर्ट से भी बड़ी नियुक्ति
इन नियुक्तियों में इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाई कोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है।
🔹 बड़े हाई कोर्ट में बदला नेतृत्व
बॉम्बे और कलकत्ता जैसे देश के महत्वपूर्ण एवं पुराने उच्च न्यायालयों को भी नया नेतृत्व मिला है। जस्टिस रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट और जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
⚠️ पंजाब में नियुक्ति को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को लेकर पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पंजाब सरकार के नेताओं ने आरोप लगाया है कि नियुक्ति के संबंध में राज्य सरकार की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि नियुक्ति केंद्र द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचित की जा चुकी है।

























































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