आकाश आनंद पर मायावती का बड़ा फैसला, फिर छिनी बड़ी जिम्मेदारी; बोलीं- अभी राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं
लखनऊ, 3 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। गुरुवार को लखनऊ में हुई बसपा की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मायावती ने साफ संकेत दिया कि आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती के मुताबिक आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है।
राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटे आकाश आनंद
आकाश आनंद इससे पहले बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं। आज के फैसले के बाद उन्हें इस जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह 2024 के बाद तीसरी बार है जब आकाश आनंद को पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाया गया है।
मायावती ने आकाश को लेकर कहा कि उनमें अभी राजनीतिक परिपक्वता की कमी है और ऐसे समय में, जब चुनाव बेहद नजदीक हैं, उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्हें पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में काम करने की अनुमति रहेगी।
कभी उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था
एक समय आकाश आनंद को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। वर्ष 2019 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बाद में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश को पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर काफी प्रमुखता मिली थी।
लेकिन इसके बाद पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। मार्च 2025 में उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाने के साथ ही बसपा से बाहर भी कर दिया गया था। बाद में मायावती ने उन्हें फिर पार्टी में शामिल किया और 2026 में उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण भूमिका मिली। अब एक बार फिर उनकी बड़ी जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हैं।
बैठक में नहीं दिखे आकाश, छोटे भाई ईशान की मौजूदगी से चर्चा तेज
आज की बैठक में आकाश आनंद की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। वहीं उनके छोटे भाई ईशान आनंद बैठक में नजर आए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या मायावती भविष्य में ईशान को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। हालांकि अभी तक इसे लेकर बसपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
2027 चुनाव को लेकर मायावती का बड़ा ऐलान
आकाश आनंद पर फैसले के साथ ही मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी पार्टी की रणनीति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि बसपा आने वाले चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी संगठन को मजबूत करने और अपने दम पर चुनावी जमीन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है मायावती के फैसले का सियासी संदेश?
आकाश आनंद को बार-बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर फिर हटाए जाने से बसपा की आंतरिक रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ताजा फैसला खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव अब राजनीतिक दलों की प्राथमिकता बन चुका है।
मायावती के बयान से यह संदेश साफ है कि फिलहाल वह पार्टी की कमान किसी युवा पारिवारिक चेहरे को पूरी तरह सौंपने के बजाय अपने अनुभव और संगठनात्मक नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही हैं। साथ ही कांशीराम की उस राजनीतिक सोच का भी हवाला दिया जा रहा है, जिसमें परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में सहयोग की अनुमति तो थी, लेकिन उन्हें सत्ता या चुनावी पद देने को लेकर सावधानी बरती जाती थी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आकाश आनंद का राजनीतिक सफर एक बार फिर थम गया है, या मायावती का यह फैसला उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है? इसका जवाब आने वाले महीनों में बसपा की चुनावी गतिविधियों से मिल सकता है।
























































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