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IAS दिव्या मित्तल की पूरी कहानी: साधारण परिवेश से IIT-IIM, लंदन की नौकरी, UPSC में तीन प्रयास और 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में करीब 13 वर्षों की यात्रा के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। 30 अगस्त 2026 को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उन्होंने अपनी प्रशासनिक यात्रा को “अविस्मरणीय” बताते हुए कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपनी इच्छा से लिया है।

उनका इस्तीफा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दिव्या मित्तल की कहानी केवल एक आईएएस अधिकारी बनने की कहानी नहीं है। यह कहानी है—साधारण परिवेश से निकलकर IIT दिल्ली तक पहुंचने की, IIM बैंगलोर में पढ़ने की, लंदन की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर भारत लौटने की, UPSC की लगातार कोशिशों से IAS बनने की और फिर प्रशासनिक पद से हटकर अपने अधूरे सपनों की ओर आगे बढ़ने की।


साधारण परिवेश में पली-बढ़ीं दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल के शुरुआती जीवन के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनके अपने इस्तीफे के संदेश से इतना स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने बचपन को “साधारण परिवेश” में बीता हुआ बताया है।

यही साधारण शुरुआत आगे चलकर असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियों में बदल गई।

सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 23 नवंबर 1983 दर्ज है। उपलब्ध जीवनी संबंधी स्रोत उन्हें हरियाणा/दिल्ली से जुड़े पारिवारिक और शैक्षणिक परिवेश से जोड़ते हैं। हालांकि उनके बचपन के शहर और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग जानकारियां मिलती हैं, इसलिए इस हिस्से में बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई अतिरिक्त दावा करना उचित नहीं होगा।

उनके जीवन की सबसे विश्वसनीय तस्वीर उनके अपने शब्दों से सामने आती है—उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था और उस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने असाधारण मेहनत की।


IIT दिल्ली में प्रवेश—पहली बड़ी सफलता

दिव्या मित्तल ने अपनी उच्च शिक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली से की और वहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

IIT जैसी देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल करना उनके विद्यार्थी जीवन की बड़ी उपलब्धि थी।

लेकिन दिव्या की महत्वाकांक्षा केवल इंजीनियर बनने तक सीमित नहीं रही।

इसके बाद उन्होंने IIM बैंगलोर से MBA किया।

इस तरह उनके शैक्षणिक सफर में भारत के दो सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों—IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर—का नाम जुड़ गया।


लंदन पहुंचीं, JP Morgan में मिली शानदार नौकरी

IIT और IIM की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्या मित्तल ने कॉरपोरेट दुनिया में कदम रखा।

वह लंदन चली गईं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंपनी JP Morgan में काम किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने वहां ट्रेडर के रूप में काम किया।

यह वह दौर था जब उनके सामने एक बेहद आकर्षक करियर मौजूद था—विदेश, प्रतिष्ठित संस्थान की नौकरी और शानदार आर्थिक संभावनाएं।

लेकिन यहीं से उनके जीवन में एक बड़ा सवाल पैदा हुआ—

क्या केवल व्यक्तिगत सफलता ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है?

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के संदेश में इसी भावना की झलक मिलती है। उन्होंने लिखा कि लंदन में नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें लगा कि “कुछ अधूरा” है और अपने देश से दूर रहना उन्हें खलता था।


विदेश की नौकरी छोड़ी और भारत लौट आईं

लंदन की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था।

उन्होंने महसूस किया कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी अपने दम पर खड़े होने की क्षमता पर उनके देश का भी अधिकार है।

उनके अपने शब्दों में, उन्हें लगा कि उन पर “इस मिट्टी का कर्ज” है और वह उसे चुकाना चाहती हैं।

यही सोच उन्हें कॉरपोरेट करियर से निकालकर सिविल सर्विस की ओर ले गई।

उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों भी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। उपलब्ध जीवनी स्रोतों के अनुसार दोनों ने साथ मिलकर UPSC की तैयारी की।


UPSC की पहली कोशिश—IAS नहीं, IRS

दिव्या मित्तल की UPSC यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प रही जितनी उनकी शैक्षणिक यात्रा।

उन्होंने पहली बार 2010 में सिविल सेवा परीक्षा दी।

इस प्रयास में उन्हें ऑल इंडिया रैंक 332 मिली और उन्हें Indian Revenue Service (Income Tax) आवंटित हुई।

लेकिन दिव्या का लक्ष्य IAS बनना था।

उन्होंने सफलता मिलने के बावजूद अपने लक्ष्य को अधूरा माना और फिर परीक्षा देने का फैसला किया।


दूसरा प्रयास—IPS तक पहुंचीं

2011 में उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा दी।

इस बार उन्होंने अपनी रैंक में बड़ा सुधार किया और AIR 134 हासिल की।

उन्हें IPS सेवा मिली और गुजरात कैडर आवंटित हुआ।

लेकिन उनकी मंजिल अभी भी IAS थी।

जहां बहुत से अभ्यर्थी एक बार सिविल सेवा में चयन के बाद अपने लक्ष्य को पूरा मान लेते हैं, वहीं दिव्या मित्तल ने तीसरी बार प्रयास करने का फैसला किया।


तीसरा प्रयास—AIR 68 और IAS

2012 की सिविल सेवा परीक्षा में दिव्या मित्तल ने आखिरकार वह हासिल कर लिया, जिसके लिए वह लगातार प्रयास कर रही थीं।

उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल की और IAS के लिए चयनित हुईं।

उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला और 2013 बैच की IAS अधिकारी के रूप में उनका प्रशासनिक सफर शुरू हुआ।

इस प्रकार उनकी UPSC कहानी तीन लगातार पड़ावों में सामने आती है—

2010 — AIR 332 — IRS

2011 — AIR 134 — IPS

2012 — AIR 68 — IAS

यह यात्रा उनके धैर्य और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता की मिसाल बन गई।


IAS बनने के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सफर

2013 बैच की IAS अधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया।

उनके करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहीं।

उपलब्ध पोस्टिंग रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के रूप में काम किया।

इसके बाद वह UPSIDC में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहीं और बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं।

इसके बाद उन्होंने संत कबीर नगर की जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

फिर उनका नाम उत्तर प्रदेश के चर्चित जिलाधिकारियों में शामिल हुआ, जब वह मिर्जापुर की जिलाधिकारी बनीं।


मिर्जापुर ने बदली पहचान—लहुरियादह गांव में पहुंचाया पानी

दिव्या मित्तल के प्रशासनिक जीवन का सबसे चर्चित अध्याय मिर्जापुर का लहुरियादह गांव रहा।

हलिया ब्लॉक का यह पहाड़ी गांव लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहा था।

ग्रामीणों को पानी के लिए टैंकरों और दूसरे सीमित स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था।

दिव्या मित्तल ने जिलाधिकारी रहते हुए इस समस्या को गंभीरता से लिया।

कई महीनों की कोशिश के बाद गांव में पाइप के जरिए पानी पहुंचाने का काम पूरा हुआ।

अगस्त 2023 में गांव में पहली बार नल से पानी पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि स्वतंत्रता के बाद करीब 75 वर्षों तक गांव के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ा था।

दिव्या मित्तल ने स्वयं इस अनुभव को अपनी प्रशासनिक यात्रा की सबसे भावुक स्मृतियों में शामिल किया है।

उन्होंने अपने इस्तीफे के संदेश में लहुरियादह की एक वृद्ध महिला का जिक्र किया, जिसने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देखकर उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था।

दिव्या के लिए वह क्षण किसी सरकारी पुरस्कार से कहीं बड़ा था।


मिर्जापुर से मिला एक बड़ा सबक

अपने इस्तीफे में दिव्या मित्तल ने लिखा कि मिर्जापुर ने उन्हें सिखाया कि “असंभव” कोई तथ्य नहीं, बल्कि एक राय है।

उनके लिए प्रशासन केवल फाइलों पर आदेश जारी करना नहीं था।

उनकी सोच में सरकारी फाइल के पीछे कोई न कोई इंसान होता है—कोई किसान, कोई गरीब परिवार, कोई दिव्यांग व्यक्ति या कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने अधिकार के लिए सरकारी व्यवस्था की ओर देख रहा होता है।

यही सोच उनकी कार्यशैली की पहचान बनी।


देवरिया की जिलाधिकारी बनीं

इसके बाद दिव्या मित्तल देवरिया की जिलाधिकारी बनीं।

वह जुलाई 2024 से मई 2026 तक देवरिया की DM रहीं।

देवरिया में भी उनकी कार्यशैली चर्चा में रही।

अपने इस्तीफे में उन्होंने देवरिया के अनुभव को याद करते हुए लिखा कि वहां से उन्होंने सीखा कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं बल्कि कर्तव्य है।


राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी

देवरिया के बाद दिव्या मित्तल कुछ समय के लिए प्रतीक्षा सूची में रहीं और मई 2026 से उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

यानी इस्तीफे की घोषणा के समय भी वह उत्तर प्रदेश शासन में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थीं।


13 साल बाद अचानक इस्तीफा क्यों?

यही सवाल अब सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है—

आखिर ऐसी सफल IAS अधिकारी ने इस्तीफा क्यों दिया?

दिव्या मित्तल ने अपने सार्वजनिक संदेश में किसी राजनीतिक दबाव, विवाद, कार्रवाई या किसी विशेष व्यक्ति को इस्तीफे का कारण नहीं बताया है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही अलग-अलग अटकलों को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

उनके अपने संदेश से जो बात सामने आती है, वह व्यक्तिगत और वैचारिक है।

उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपने लिए देखे सपने पूरे कर लिए हैं और अब वह अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना चाहती हैं।

यानी उनका संदेश संकेत देता है कि वह सरकारी पद से आगे किसी नए उद्देश्य या नई भूमिका की ओर बढ़ना चाहती हैं।


“पद छूट गया, लेकिन सपना नहीं”

दिव्या मित्तल के इस्तीफे का सबसे भावुक हिस्सा उनका अंतिम संदेश है।

उन्होंने अपने प्रशासनिक सफर को याद करते हुए कहा कि पद समाप्त हो सकता है, लेकिन देश के लिए देखा गया सपना समाप्त नहीं होगा।

उन्होंने उन लोगों को अपनी यात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा बताया जिनकी जिंदगी में प्रशासनिक हस्तक्षेप से बदलाव आया।

उनके लिए सबसे बड़ा संतोष उस परिवार की आंखों में था जिसे पहली बार जमीन का अधिकार मिला, उस दिव्यांग व्यक्ति में था जिसे सम्मान से जीने का अवसर मिला और उस किसान में था जिसके खेत तक पानी पहुंचा।

उनकी सोच का सार यही था कि सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा की रक्षा करना ही न्याय है।


इस्तीफे के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल?

अभी दिव्या मित्तल ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि IAS से इस्तीफे के बाद उनका अगला कदम क्या होगा।

हालांकि उनके संदेश से इतना संकेत जरूर मिलता है कि वह अपने उन सपनों पर काम करना चाहती हैं जिन्हें वह सार्वजनिक जीवन और देश के लिए देखती रही हैं।

हाल में उनकी पहली किताब के बाजार में आने का भी उल्लेख रिपोर्टों में हुआ है।

इसलिए उनके भविष्य को लेकर किसी निश्चित राजनीतिक या सामाजिक भूमिका का दावा करना अभी जल्दबाजी होगी।


दिव्या मित्तल की कहानी का सार

दिव्या मित्तल का जीवन एक असाधारण करियर यात्रा की कहानी है—

साधारण परिवेश → IIT दिल्ली → IIM बैंगलोर → लंदन में JP Morgan → भारत वापसी → UPSC 2010 में AIR 332 → UPSC 2011 में AIR 134 → UPSC 2012 में AIR 68 → IAS 2013 बैच → गोंडा → UPSIDC → बरेली → संत कबीर नगर → मिर्जापुर → देवरिया → राजस्व विभाग, विशेष सचिव → 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफे की घोषणा।

उनकी कहानी की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने सफलता को केवल पद और वेतन से नहीं देखा।

विदेश की शानदार नौकरी छोड़कर भारत लौटना, IRS और IPS मिलने के बाद भी IAS के लिए प्रयास जारी रखना और फिर IAS बनने के बाद भी ग्रामीण समस्याओं पर व्यक्तिगत स्तर पर काम करना—इन सभी घटनाओं ने उनकी अलग पहचान बनाई।

लहुरियादह की बूढ़ी मां का आशीर्वाद उनके लिए शायद पूरे प्रशासनिक करियर का सबसे बड़ा सम्मान बन गया।

और आज, जब उन्होंने 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को विराम देने का फैसला किया है, तो उनके शब्दों में एक बात साफ सुनाई देती है—

पद बदला है, सपना नहीं।

दिव्या मित्तल की IAS यात्रा समाप्त हो रही है, लेकिन उनके अनुसार देश के लिए देखा गया सपना अभी बाकी है।


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