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वसूली के आरोप में फंसे चार सिपाही, सेवा समाप्ति की तैयारी

•सर्राफ को स्मैक के मामले में फंसाने की धमकी देकर मांगे थे दो लाख रुपये, जांच में आरोप सही पाए जाने का दावा

शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सर्राफा कारोबारी को स्मैक के मामले में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर दो लाख रुपये की वसूली मांगने के मामले में चार सिपाहियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद पुलिस विभाग ने चारों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है।

बताया जा रहा है कि चार सिपाहियों पर आरोप है कि उन्होंने सर्राफा कारोबारी को मादक पदार्थ के मामले में फंसाने की धमकी दी और इसके बदले दो लाख रुपये की मांग की। शिकायत और जांच के बाद सामने आए तथ्यों को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। अब विभागीय स्तर पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

कॉल रिकॉर्डिंग भी बनेगी अहम साक्ष्य

मामले की विवेचना में सर्राफा कारोबारी और उसके पिता के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाएगा। जांच अधिकारियों का मानना है कि बातचीत की रिकॉर्डिंग से पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है।

पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने कहा है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

दो नामजद सिपाही गिरफ्तारी से बचने की कोशिश में

मामले में नामजद मेरठ निवासी सिपाही अरुण चित्तौड़िया और तुपार पर भी पुलिस की कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि एसओजी के पहुंचने से पहले दोनों गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली चले गए। वहां उन्होंने अपने परिचितों के माध्यम से अधिवक्ताओं से संपर्क कर अग्रिम जमानत लेने की कोशिश की।

पुलिस को लोकेशन की जानकारी मिलने के बाद एसओजी दिल्ली पहुंची, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही दोनों वहां से निकल गए। अब पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

भ्रष्टाचार पर सख्ती से क्या बदलेगा पुलिस का चेहरा?

यह मामला केवल चार सिपाहियों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि किसी पुलिसकर्मी पर वसूली, धमकी या झूठे मुकदमे में फंसाने के आरोप जांच में प्रमाणित होते हैं, तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई से यह संदेश जा सकता है कि वर्दी का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए करने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा।

हालांकि सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई से पहले विभागीय जांच, साक्ष्यों की निष्पक्ष समीक्षा और संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है। यदि आरोप विधिवत सिद्ध होते हैं, तो ऐसी कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन और जनता के विश्वास को मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकती है।

अब निगाह इस बात पर है कि जांच के अंतिम निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और चारों सिपाहियों के खिलाफ विभाग किस स्तर की कार्रवाई करता है।


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