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महिलाओं को केवल कर्ज नहीं, आमदनी बढ़ाने पर हो जोर : केशव प्रसाद मौर्य

•लखपति दीदी बनेंगी उत्तर प्रदेश की पहचान, 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और 1 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अनुबंधित तकनीकी सहयोगी एजेंसियों, बैंकरों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों और एचसीएल संस्था के कार्यों की समीक्षा के लिए बुधवार को योजना भवन, लखनऊ में बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने की। राज्य मंत्री, ग्राम्य विकास विभाग विजय लक्ष्मी गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

महिला उद्यमी योजना में पहली किश्त 20 हजार रुपये

उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि एक करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रथम किश्त के रूप में 20 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाने हैं। इस राशि का ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। इसके बाद दूसरी किश्त के रूप में 30 हजार रुपये उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल और सुगम बनाई जाए, ताकि उन्हें बैंक और विभागों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

गरीब महिलाओं के लिए सहयोगात्मक रवैया अपनाएं बैंक

बैंकरों को निर्देश देते हुए मौर्य ने कहा कि गरीब महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए। केवल लाभ कमाने की मंशा से काम करने के बजाय पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय सहयोग किया जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार ब्याज का वहन कर रही है, इसलिए पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को केवल महिला कल्याण तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि यह गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

कम लागत में ई-रिक्शा उपलब्ध कराने पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने डेवलपमेंट अल्टरनेटिव संस्था को निर्देश दिए कि मिशन के अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 2 लाख रुपये तक के अच्छे ई-रिक्शा की पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाओं को ऐसे ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएं, जिनकी लागत कम हो और जिनसे महिलाओं को अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।

हर संकुल स्तरीय संघ के पास हो ड्रोन

महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। मौर्य ने निर्देश दिए कि योजना तैयार कर प्रत्येक संकुल स्तरीय संघ के पास कम से कम एक ड्रोन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाए।

ड्रोन के माध्यम से कृषि और अन्य गतिविधियों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ महिलाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा करने की बात कही गई।

बीमा क्लेम में गरीब परिवारों को न हो परेशानी

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऋण देते समय बैंकों की ओर से बीमा तो कर दिया जाता है, लेकिन बीमा क्लेम के समय गरीब परिवारों और आश्रितों को परेशान होना पड़ता है। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए बीमा क्लेम मामलों का संवेदनशील, शालीन और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गरीब महिलाओं के साथ किसी प्रकार का छल या धोखाधड़ी न हो और इस पर लगातार निगरानी रखी जाए।

पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से बढ़ेगी महिलाओं की आय

महिलाओं को गाय-भैंस खरीदने के लिए सरल और सुगम तरीके से ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इससे प्रदेश में अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार का सम्मान बढ़ेगा और बच्चों के स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 5 मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां महिला दुग्ध उत्पादकों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

योजनाओं की जानकारी हर पात्र महिला तक पहुंचाने के निर्देश

मौर्य ने बैंकर्स और अधिकारियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और उन्हें समय से लाभ दिलाना संबंधित विभागों एवं संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

13 जिलों में काम कर रही एचसीएल संस्था

बैठक की शुरुआत में एचसीएल संस्था की ओर से प्रदेश में किए जा रहे कार्यों और उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। संस्था द्वारा स्मार्ट स्कूल, स्वास्थ्य और समुदाय आधारित जागरूकता सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

बताया गया कि संस्था अपने अधिकांश सीएसआर फंड का उपयोग उत्तर प्रदेश में कर रही है और वर्तमान में 13 जनपदों में कार्यरत है। उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि किसी जनपद को संतृप्त करने तक वहां कार्य निरंतर जारी रखा जाए, ताकि संचालित कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लोगों को स्थायी लाभ मिल सके।

बैठक में सहयोगी संस्थाओं ने अपने-अपने कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी साझा की और महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों तथा दुग्ध उत्पादक महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अरुण कुमार, अपर मिशन निदेशक जयनाथ यादव, संयुक्त मिशन निदेशक प्रवीणानन्द एवं देवेंद्र कुमार ओझा सहित विभिन्न बैंकों, तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के प्रमुख और मिशन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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