25 साल से सेवा सुरक्षा की आस, शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा योजना का किया बहिष्कार,
•331 अनुदानित महाविद्यालयों के करीब 3000 शिक्षक सेवा विनियमन व यूजीसी वेतनमान की मांग पर मुखर।
देवरिया बरहज। शासन द्वारा अनुदानित महाविद्यालय बाबा राघवदास भगवानदास पी.जी. कालेज में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों ने लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का सांकेतिक बहिष्कार किया। शनिवार को शिक्षकों ने बरहज तहसील पहुंच उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवाओं के विनियमन अथवा यूजीसी वेतनमान के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय और सेवा सुरक्षा की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2000 से संचालित इस व्यवस्था में प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों के करीब 3000 शिक्षक यूजीसी निर्धारित योग्यता के अनुरूप वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन करीब 25 वर्ष बाद भी उनकी सेवा सुरक्षा और पारिश्रमिक का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। कई शिक्षक अब 45 से 60 वर्ष की आयु में पहुंच चुके हैं।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि कैशलेस चिकित्सा योजना का बहिष्कार का उद्देश्य सरकार का ध्यान आकर्षित कराना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ रोजगार और सेवा सुरक्षा भी शिक्षक के सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक है।
ज्ञापन में अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने, संबंधित शिक्षकों की सेवाओं को नियमानुसार विनियमित अथवा संरक्षित करने तथा वैकल्पिक रूप से यूजीसी वेतनमान के अनुरूप निश्चित एवं सम्मानजनक मानदेय देने की मांग की गई।
इसी क्रम में बाबा राघवदास भगवानदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी सांकेतिक बहिष्कार करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा और “शिक्षक एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए। आंदोलन प्रमुख डॉ. मंजू यादव एवं सह आंदोलन प्रमुख डॉ. धनंजय तिवारी के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में डॉ. विनय तिवारी, डॉ. अरविन्द पाण्डेय, डॉ. अवधेश यादव, डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय, डॉ. अविकल शर्मा, डॉ. रणधीर श्रीवास्तव, डॉ. सुनील कुमार श्रीवास्तव, डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. वेद प्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे। शिक्षकों ने शासन से 25 वर्षों से लंबित समस्या का शीघ्र सकारात्मक समाधान करने की मांग की।


























































Leave a comment