मनुष्य शरीर परमात्मा का बनाया सच्चा हरि मन्दिर सच्ची मस्जिद है : जय गुरुदेव
आज़मगढ़ तहबरपुर 30 दिस मनुष्य शरीर परमात्मा का बनाया सच्चा हरि मन्दिर सच्ची मस्जिद है यह भगवान की भक्ति खुदा की इबादत के लिये मिला है मालिक ने इंसान बनाया जातियाँ जन्म से नहीं कर्म से बनी दोनों आंखों के मध्य भाग में आत्मा, रूह विराजमान है इसमें प्रभु की परासृष्टि को देखने की आंख और देववाणी, कलमा सुनने का कान है अपने जीवन में कुछ समय मालिक की याद के लिये भी निकालें यह उद्गार पंकज जी महाराज ने श्री नरसिंह राय इण्टर कालेज बैरमपुर, सेमरी के प्रांगण में आयोजित सत्संग समारोह में व्यक्त किया मौका था अच्छे समाज के निर्माण व मालिक की भजन इबादत की प्रेरणा देने व शाकाहारी सदाचारी बनाने व नषा त्याग की प्रेरणा देने के उद्देष्य से निकली 80 दिवसीय 6 प्रान्तीय जनजागरण यात्रा के बारहवें पड़ाव का
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा प्रत्येक मानव को यह अनमोल शरीर परमात्मा की प्राप्ति के लिये मिला है इसका वादा भी मां के पेट में सबने किया था लेकिन संसार में आकर अपना किया वादा भूल गये और मनुष्य शरीर के अन्दर प्रभु के पाने की पराविद्या के उद्देष्यों को भूल बैठे यदि आपने हिंसा अपराध और अषुद्ध खान-पान नहीं छोड़ा तो दुनिया की कोई भी चीज आपकी जीवात्मा को अधोगति में जाने से बचा नहीं सकती भाईयों, बहनों यहां पैदा होने से पहले लोग कहां थे मृत्यु के बाद कहां जायेंगे जिनका शरीर छूट गया वह कहां हैं यह मनुष्य का जटिल प्रष्न है यह प्रष्न तब तक हल नहीं हो सकता जब तक कि प्रभु प्राप्ति वाले संत महात्मा न मिल जायें
बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी ने कहा कि आपकी धर्म पुस्तकों में ब्रह्मा जी और उनके पुत्र लोमस ऋषि का ऐसा वर्णन आया है कि सारे जीव काल की पूजा कर रहे हैं दयाल की न तो लोगों को जानकारी है, न उनकी पूजा करते हैं यहां के बन्धनों से कैसे मुक्त हो सकते हैं इस सम्बन्ध में ब्रह्मा जी ने लोमस ऋषि को समझाया कि हे लोमस ऋषि गंगा स्नान का भारी फल है पीपल की पूजा करो, व्रत करो और नाना प्रकार के उपाय बताये लेकिन लोमस ऋषि ने उत्तर दिया कि हजारों वर्ष गंगा स्नान करने से मुझे मछली की योनि मिली और जीवों ने मार-मार कर खाया अन्य बहुत से जप-तप व्रतों से विभिन्न प्रकार से योनियां मिली और मुक्ति नहीं मिली तब अन्त में ब्रह्मा जी ने कहा हे लोमस ऋषि ‘‘सन्त शरण से होय उबारा सन्तों की शरण से ही जीवों को मुक्ति मिलती है
जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था के अध्यक्ष पंकज जी महाराज ने कहा जातियां जन्म से नहीं कर्म से बनीं जाति-पांति के रगड़े-झगड़े मन की खुराफात है धर्म, जाति के नाम पर लड़ना, झगड़ना इंसानों का काम नहीं अभी तक बहुत लड़ाईयां लड़ ली इससे नफरत के सिवा क्या मिला यह इंसानों का काम नहीं आप के जीवन की असली चीज उस परमात्मा का भजन करना है इसलिये अभी वक्त है उस परमात्मा, उस खुदा से माफी मांगने का अगर आप के हाथ से मानव तन का अधिकार चला गया तो दुबारा यह मानव शरीर मिलने वाला नहीं भटकते रह जाओगे इसलिये शाकाहारी-सदाचारी बनें, नषों का त्याग करें महाराज जी ने जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आगामी 18 से 20 मार्च 22 तक आयोजित होने वाले होली सत्संग में पधारने का निमन्त्रण दिया इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत जिला आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष रामचरन यादव, विद्यालय प्रबन्धक जय प्रकाष राय, डा. नरेन्द्र, कपिल पाल, ठाकुर प्रसाद यादव, सूर्यभान यादव, उमेष पाण्डेय, डा. जे.पी. यादव, रामभुवन मौर्य, सूर्यभान मौर्य, गिरीष चन्द यादव, बलिहारी, प्रहलाद यादव, सकलदीप पाल, संतोष यादव पू.प्रधान तथा संस्था के महामन्त्री बाबूराम यादव, मंत्री विनय कुमार सिंह, उ.प्र. संगत के अध्यक्ष संतराम चौधरी, बिहार प्रान्त के अध्यक्ष मृत्युन्जय झा, दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष विजय पाल सिंह, म.प्र. संगत के महासचिव बी.बी. दोहरे, प्रबन्ध समिति के सदस्य अनूप कुमार सिंह, सतीश उपाध्याय, भरत कुमार टी. मिस्त्री ‘नानक जी’, राजेष, अखिलेष यादव, डा. कुंवर बृजेष सिंह आदि मौजूद रहे। प्रषासन ने शांति एवं सुरक्षा की व्यवस्था किया सत्संग के बाद जनजागरण यात्रा अपने अगले पड़ाव अषोका इण्टर कालेज का मैदान डोमरी रामपुर कारखाना देवरिया के लिये प्रस्थान कर गई।


























































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