पुण्य श्लोक अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि त्रिशताब्दी स्मृति मनाई गई : मुहम्मदपुर
मुहम्मदपुर /आजमगढ़।मुहम्मदपुर ब्लाक परिसर में पूर्व मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य डॉक्टर कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा के आयोजन में कार्यक्रम हुआ
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉक्टर संगीता बलवंत रहीं। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा पुण्य श्लोक अहिल्याबाई होल्कर के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रजल्वित किया गया। उसके उपरांत कार्यक्रम के आयोजक डॉ कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा व कार्यक्रम संयोजक दिनेश जायसवाल ने मुख्य अतिथि डॉक्टर संगीता बलवंत बिन्द को बुके व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉक्टर कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा ने अहिल्याबाई होल्कर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा की अहिल्याबाई होल्कर एक शिव भक्त थी उन्होंने आताताई ताकतों द्वारा तोड़े गए मंदिरों के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान निभाया था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रही राज्यसभा सांसद संगीता बलवंत बिन्द ने अपने संबोधन में कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 13 में 1725 ई को चौड़ी गांव हैदराबाद में हुआ था और वह मराठा संघ की एक भाग मालवा क्षेत्र की शासक थी। उनकी मृत्यु 13 अगस्त 1795 को इंदौर में हुई। उन्होंने कहा कि आज हम लोग अहिल्याबाई होल्कर की जयंती बड़े ही धूमधाम से मना रहे हैं। श्लोक का अर्थ पवित्र होता है मंत्र के पवित्र नाम जैसी शुद्ध नाम अहिल्याबाई होल्कर जी को दिया गया था। वह एक शिव भक्त थी और वह शिव की आराधना करती थी एक बार उनके ससुर शिव मंदिर के पास पहुंचे तो क्षेत्र के लोग दूर हटने लगे लेकिन अहिल्याबाई होल्कर शिवजी की आराधना में लीन रही यह देखकर उनके ससुर ने उसी दिन यह निश्चित कर लिया कि इनको मैं अपने पुत्रवधू बनाऊंगा। बहुत कम समय में ही उनके ससुर व उनके पति की मृत्यु हो गई। एक बार उनके पुत्र के रथ से एक गाय के बछड़े की मृत्यु हो गई थी और गए अपने बछड़े के पास बैठी थी उसी समय अहिल्याबाई होल्कर का भी रथ उसी रास्ते से गुजर रहा था गाय के बछड़े को मरा हुआ जब उन्होंने देखा तो अपना रथ रोक कर लोगों से पूछा कि यह कैसे हुआ तो लोगों ने बताया कि आपके पुत्र के रथ से इस बछडे बछड़े की मृत्यु हो गई। तब उन्होंने अपने सिंहासन पर बैठकर अपने पुत्र को ही सजा सुनाई कि जिस प्रकार से रथ से उसे बछड़े की मृत्यु हुई है उसी प्रकार से रथ को तैयार किया जाए और रख के आगे मेरे पुत्र को बांधा जाए जिसके लिए कोई भी व्यक्ति रथ चलाने के लिए जब तैयार नहीं हुआ तो अहिल्याबाई होल्कर ने खुद रथ चलाने का निर्णय लिया और रथ पर सवार हो गई इस समय व्रत के सामने वह गाय आ गई और वहां से लाख प्रयास के बाद भी नहीं हट रहीं थी। तब लोगों ने अहिल्याबाई होल्कर को समझाया कि यह गाय भी नहीं चाहती कि जिस प्रकार से पुत्र वियोग में मैं हूं उस प्रकार से कोई दूसरी मां भी पुत्र वियोग में रहे। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख विजय कुमार विश्वकर्मा, अरविन्द यादव पिंटू, अवधेश चौहान, मंडल अध्यक्ष मनीष राय, अंकित चौहान, राजीव चौहान, सुनील आर्या, संतोष कुमार, शिवलाल यादव, समीर चौहान आदि लोग उपस्थित रहे।

























































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