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सहारनपुर में नकली ₹20 के सिक्कों के बड़े नेटवर्क का खुलासा, 6,400 सिक्के बरामद

•₹70 करोड़ से अधिक के कथित नेटवर्क की जांच, 3.5 करोड़ सिक्के बाजार में खपाने का पुलिस को शक

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने नकली ₹20 के सिक्के तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने वाले कथित बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 6,400 नकली ₹20 के सिक्के बरामद किए हैं, जिनका अंकित मूल्य करीब ₹1.28 लाख है। इसके साथ ही नकली सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, लोहे की डाई, अन्य उपकरण, आठ मोबाइल फोन और वाहन भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान कुल आठ लोगों के गिरोह से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब फरार तीन आरोपियों की तलाश में जुटी है और गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।

₹70 करोड़ से ज्यादा के नेटवर्क का दावा जांच के घेरे में

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल कथित तौर पर ₹70 करोड़ से अधिक के नकली सिक्कों के नेटवर्क को लेकर है। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि करीब 3.5 करोड़ नकली ₹20 के सिक्के बाजार में पहुंचाए गए हो सकते हैं। हालांकि यह आंकड़ा फिलहाल पुलिस की प्रारंभिक जांच का अनुमान है, जबकि मौके से बरामद नकली सिक्कों की संख्या 6,400 है।

पुलिस इस अनुमान की पुष्टि के लिए आरोपियों के कब्जे से मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन की जांच कर रही है। इन दस्तावेजों और मोबाइल डाटा से नकली सिक्कों के निर्माण, सप्लाई और बाजार में खपाने से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

टोल प्लाजा और नकद लेनदेन वाली जगहों पर खपाने का आरोप

जांच में यह बात भी सामने आने की जानकारी है कि नकली सिक्कों को ऐसी जगहों पर खपाया जाता था, जहां बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन होता है। रिपोर्टों के मुताबिक टोल प्लाजा समेत अन्य नकद लेनदेन वाली जगहों पर इन सिक्कों को चलाने की कोशिश की जाती थी।

बताया जा रहा है कि ₹4,000 के नकली सिक्के बाजार में चलाने के बदले ₹400 कमीशन दिए जाने की व्यवस्था थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और नकली सिक्कों को किन-किन इलाकों में भेजा जाता था।

मुख्य आरोपी के पुराने कनेक्शन की भी जांच

मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम सामने आया है। पुलिस गिरोह के पुराने संपर्कों और कथित गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। जांच में वर्ष 2001 से कथित गतिविधियों से जुड़े कनेक्शन की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस का फोकस अब सिर्फ बरामद नकली सिक्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर है कि सिक्के कहां बनाए जाते थे, किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे और उन्हें बाजार में किस माध्यम से खपाया जाता था।

बरामदगी से खुलेंगे नेटवर्क के कई राज

पुलिस द्वारा जब्त किए गए रजिस्टर और मोबाइल फोन इस मामले में अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं। इनके जरिए संभावित लेनदेन, संपर्कों, सप्लाई चैन और सिक्कों की संख्या से संबंधित जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नकली सिक्कों का वास्तविक नेटवर्क कितना बड़ा था और बाजार में वास्तव में कितने सिक्के पहुंचाए गए।


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