मोहम्मदाबाद गोहाना में हुआ ग्राम पंचायत के कार्यो का सत्यापन
मऊ विकासखंड मोहम्मदाबाद गोहना में सोशल ऑडिट टीम सदस्यों द्वारा वर्ष 2020 -21 में ग्राम पंचायतों में द्वारा कराए गए कार्यों का सत्यापन कार्य चल रहा है जिसमें ब्लॉक कोऑर्डिनेटर तथा बीआरपी टीम लीडर के रूप में कार्य कर रहे हैं बताते चलें कि विकासखंड मोहम्मदाबाद गोहना के चक जाफरी गांव में टीम सदस्यों द्वारा सत्यापन कार्य किया जा रहा है जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता कि शिकायतें ग्रामीणों द्वारा की जा रही थी टीम सदस्यों ने भी अपने सत्यापन में पाया 3 दिन कार्य सत्यापन के समय ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तथा तकनीकी सहायक व ग्राम प्रधान उपस्थित होकर सोशल ऑडिट में सहयोग करना था परंतु किसी भी कर्मचारी उपस्थित नहीं होने से सोशल ऑडिट कार्य प्रभावित रहा साथ ही कोई भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया और ना ही किसी प्रकार का सहयोग दिया गया इस बावत टीम सदस्यों ने जब ग्राम प्रधान से टेलिफोनिक वार्ता की तो उन्होंने कहा कि मेरी बात जयचंद राम से हो चुकी है यही बात ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने भी बताया गुरुवार को चक जाफरी गुरादरी मठ के निकट प्राथमिक विद्यालय पर गांव सभा की खुली बैठक का आयोजन किया गया जिसमें काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे परंतु मैं न तो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी उपस्थित हुआ और ना ही ग्राम प्रधान , ग्राम पंचायत सदस्य चंद्रिका ,रीता देवी, शैलेश ,सुखराम ,सविता, उषा, मधु ,सोनिया, लक्ष्मीना, कुसुम ,कुमारी ,इतवारी ,संगीता, आशा ,उर्मिला आदि ने लिखित साक्ष्य सहित बताया कि चक जाफरी में घोर वित्तीय अनियमितता की गई है गुरादरी मठ प्रांगण में एक भी पौधे नहीं लगाए गए हैं परंतु वृक्षारोपण पर गलत भुगतान किया गया है जो रिकवरी योग्य है ग्राम प्रधान ने धार्मिक स्थल को भी नहीं बख्शा है इसी प्रकार काफी संख्या में ऐसे मजदूर सुनार बिरादरी वह अन्य जाति के हैं कुछ लोग घर नहीं रहते हैं मुंबई रहते हैं परंतु उनके खाते में भी मजदूरी का भुगतान किया गया है कई चक मार्ग ऐसे हैं जिसका निर्माण कागज में हुआ है साथ ही पशु आश्रय परिवार में एक बना है परंतु लोगों दो लोगों को भुगतान किया गया है सोशल ऑडिट टीम सदस्य मनसा यादव, एसके पांडेय ,कामता प्रसाद, नायक ने बताया कि सोशल ऑडिट में टीम लीडर जयचंद राम की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तथा ग्राम प्रधान दोनों ने बताया कि हमारी बातें जयचंद से हुई है तो आखिर खुली बैठक में उपस्थिति क्यों नहीं हुई जो समझे के घेरे में हैं |


























































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