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पेरियार के विचार पाखंडवाद पर गहरा प्रहार करते हैं:- वीरेंद्र यादव

लखनऊ।पेरियार ई वी रामास्वामी नायकर के जन्मदिवस पर 17 सितंबर को  सामाजिक चेतना फाउंडेशन न्यास के द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सामाजिक न्याय सम्मेलन का आयोजन गांधी सभागार कैसरबाग में किया गया। सामाजिक न्याय सम्मेलन में विचार गोष्ठी का विषय था पाखंड वाद के विरोध और वैज्ञानिक चिंतन के विकास में पेरियार की शिक्षाओं का योगदान।

 कार्यक्रम का शुभारंभ बहुजन विचारक श्री पेरियार, शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान, पेरियार ललई सिंह यादव की फोटो प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया। देशभर से आए हुए प्रतिभागियों एवं जनसमूह , मुख्य अतिथियों , विशेष अतिथियों, वक्ताओं एवं विशेष वक्ताओं का स्वागत संस्था के सचिव महेंद्र कुमार मंडल अधिवक्ता उच्च न्यायालय ने किया। कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए विशेष वक्ता विजय बंधु ने कर्मचारियों को एकजुट होकर निजीकरण और पुरानी पेंशन के लिए संघर्ष करने का आवाहन किया। 

कार्यक्रम में पत्रकार एवं संपादक नेशनल दस्तक शंभू कुमार ने बहुजन साथियों से वैज्ञानिक चिंतन , तार्किक विचारधारा अपनाने के लिए जोर दिया तथा कहा कि संविधान की सुरक्षा अच्छी शिक्षा से ही की जा सकती है। सामाजिक-शैक्षणिक एवं संवैधानिक संस्थाओं पर किए जा रहे हमलों से सचेत होकर एकजुट होकर लड़ने के लिए शंभू  कुमार ने आम जनमानस से अपील की।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अगले वक्ता पूर्व विधायक रामपाल यादव ने सभी साथियों से संविधान बचाने के लिए एकजुट होकर लड़ने को कहा एवं युवाओं से आगे आकर समाज का नेतृत्व करने के लिए गुजारिश की। सामाजिक न्याय सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ लक्ष्मण यादव ने अपना विचार रखते हुए कहा लखनऊ शहर में पेरियार जी की जयंती मनाना एक अद्भुत  घटना है तथा लखनऊ में किसी सम्मेलन में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनमानस उपस्थित है। प्रोफेसर लक्ष्मण ने बहुजन समाज को वैज्ञानिक चिंतन और तर्कशीलता अपनाकर अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए जागरूक किया तथा लोगों से भारी संख्या में देश-विदेश और प्रदेश से विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवाहन किया। कार्यक्रम के अगले वक् रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि दलित और पिछड़े समाज में परिवर्तन तभी आ सकता है जब समाज सांस्कृतिक आंदोलन करके अपने हितों की सुरक्षा करे क्योंकि समाज पाखंडवाद में फंसा हुआ है। उसे तय करना है कि उसे कावड़ चाहिए या कालेज, प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि समाज का नेतृत्व विश्वविद्यालय व विद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से निकली हुए ही कर रहे हैं और वही कर सकते हैं इसलिए बहुजन समाज को अपने शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण उनका विकास और और समाज में शिक्षा के विकास के लिए जोर देना चाहिए। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे राज्यसभा सांसद माननीय पी विल्सन वरिष्ठ अधिवक्ता माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपना विचार रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से तमिलनाडु में पेरियार जी के जन्म दिवस को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है वह भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि पूरे देश में पेरियार जी की जयंती को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाएं। विल्सन ने उपस्थित सभी बंधुओं को  सामाजिक न्याय की शपथ दिलवाई , विल्सन ने कहा कि पेरियार के विचार सामाजिक न्याय के विचारों से ओतप्रोत था उनका विचार शिक्षा के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के लिए समाज को आगे आना चाहिए ।

सम्मेलन के अंत में न्यास के संरक्षक जस्टिस वीरेंद्र सिंह  पूर्व न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपना विचार रखते हुए कहा कि पेरियार के विचार पाखंडवाद पर गहरा प्रहार थे उन्होंने उल्लेख किया कि हमारा समाज इतना शिक्षित होने के बावजूद भी पाखंडवाद में उलझा हुआ है हम अपने समाज को अगर आगे ले जाना चाहते हैं तो इसमें महिलाओं को आगे आकर समाज की कुरीतियों को खत्म करने के लिए अपना योगदान देना होगा तथा वैज्ञानिक चिंतन पर आधारित विचार और विश्वास को अपनाना होगा हमें चौपालों सम्मेलनों अन्य सामाजिक आयोजनों के माध्यम से अंधविश्वास और पाखंड वाद से निकलने के लिए समाज को जागरूक करना होगा, कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी साथियों को बीडी नकवी पूर्व जनपद न्यायाधीश ने धन्यवाद ज्ञापन कर किया. कार्यक्रम का संचालन  प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद वर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय ने किया, कार्यक्रम के आयोजन में विशेष रुप से देवेंद्र सिंह अधिवक्ता उच्च न्यायालय जिन्होंने पेरियार ललई सिंह यादव एवं पेरियार ई वी रामास्वामी जी के पूरे जीवन और विचारों से संबंधित लेख पत्र आए हुए सभी साथियों को वितरित किया, कार्यक्रम में डॉ राजेश यादव, डॉक्टर ओम प्रकाश कनोजिया, ज्ञानेंद्र ,  पुष्पेंद्र ,  आरबी यादव , संजय कुमार  व  संतोष के यादव सहित हजारों लोग उपस्थित रहे।


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