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नीट में सफल छात्र सूरज विश्वकर्मा का विद्यालय में किया गया जोरदार स्वागत

जौनपुर समोधपुर- श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज समोधपुर के पूर्व छात्र सूरज विश्वकर्मा के नीट परीक्षा में सफल होने पर  गांधी स्मारक विद्यालय संकुल के प्रबंधक  हृदय प्रसाद सिंह 'रानू', पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रणजीत सिंह ,प्रधानाचार्य विनोद सिंह द्वारा अंगवस्त्रम भेंट करके व माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।प्रबंधक ने छात्र की सफलता पर उसके हौसले, जुनून,लगन  और समर्पण को सराहा।उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में स्थित इस विद्यालय में महानगरों की तुलना में पर्याप्त संसाधनों का अभाव होते हुए भी और बिना किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट में दाखिला लिए नीट में 4843 वीं रैंक हासिल करना विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है।प्रबंधक ने छात्र के जज्बे की भूरि- भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि आर्थिक संकट और  तमाम समस्याओं का सामना करते हुए छात्र ने जो उपलब्धि हासिल की है इसके लिए विद्यालय परिवार सुखद अनुभूति कर रहा है और धन्य हैं ऐसे माता-पिता जिन्होंने ऐसे होनहार बेटे को जन्म दिया। प्रबंधक ने सूरज को 'उम्मीदों और जज्बे का सूरज' की संज्ञा दी जिससे तमाम गरीब और संघर्षशील छात्र प्रेरित होंगे।  उन्होंने विद्यालय के छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत  बताते हुए आगे चलकर ऊंचाई की  बुलंदियों को छूने के लिए  हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रणजीत सिंह ने बताया कि यह विद्यालय तमाम होनहार विद्यार्थियों  को विभिन्न न्यायिक, वैज्ञानिक, धार्मिक, राजनीतिक, आध्यात्मिक तथा प्रशासनिक पदों पर आसीन कराने में उल्लेखनीय योगदान दे चुका है  जिसके क्रम में इस मेधावी छात्र ने  अपना  ही नहीं बल्कि अपने माता पिता, विद्यालय परिवार, पूरे जनपद एवं प्रदेश का जलवा आज पूरे देश में बिखेर कर यह साबित कर दिया है कि यदि हौसला हो तो जिंदगी की बुलंदियों को छूना असंभव नहीं है  और विषम परिस्थितियां समस्याएं तथा अभावग्रस्त जिंदगी पूरी तरह से बनी साबित होने लगती है।पूर्व प्रधानाचार्य ने दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ - "कौन कहता है कि आसमान में सुराख हो नहीं सकता , बस एक पत्थर  तबियत से उछालो यारों।" दोहराते हुए छात्रों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बताया कि इसकी प्रतिभा इस प्रकार झलकती थी कि  देख कर ही लगता था कि यदि यह छात्र कंपटीशन में यह शामिल होगा तो जरुर सफलता हासिल करेगा ।यह अपनी जिज्ञासाओं को लेकर शिक्षकों के पास जाता था। उन्होंने कहा कि जो छात्र आर्थिक दृष्टि से कमजोर हैं किंतु इरादे मजबूत हैं उनके लिए इस छात्र का जीवन अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय करना और कांसेप्ट क्लियर रखना यही पर्याप्त है।

प्रधानाचार्य विनोद सिंह  ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अन्य छात्रों को भी इस सफलता से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि जीवन में ऊंचाइयां छूने के लिए  तप-त्याग और समर्पण की आवश्यकता होती है। जो छात्र त्यागमय जीवन व्यतीत करते हुए अपने लक्ष्य के प्रति  अडिग रहता है  उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक दृष्टिकोण से तमाम विभागों में अनगिनत अधिकारी कर्मचारी विभिन्न सम्मानित पदों पर आसीन होकर विद्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। 

परीक्षा में सफलता हासिल करने के बारे में सूरज का कहना है कि पूर्व  प्रधानाचार्य का कुशल मार्गदर्शन और शिक्षकों की प्रेरणा से  यह परीक्षा उत्तीर्ण कर सका। उन्होंने सभी छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए बताया कि  कक्षा 9 से ही नोट्स बनाने और कड़ी मेहनत में मैं जुट गया था। यदि सफलता चाहिए तो इसके लिए नियमित रूप से 5 से 6 घंटे अध्ययन करना चाहिए सतत पढ़ाई जारी रहे और बीच-बीच में ब्रेक करके फिर पढ़ना चाहिए ताकि  ऊब न   महसूस हो। उन्होंने बताया कि जो भी फैक्ट हो उसका बार-बार नियमित रिवीजन करना चाहिए और उस पर मंथन करना चाहिए।  हम कितने घंटे पढ़ते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि हम क्या पढ़ रहे हैं यह महत्वपूर्ण है और हम कितने एकाग्र चित्त हैं ।कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी प्रवक्ता विनय कुमार त्रिपाठी ने किया। मौके पर विद्यालय संकुल के समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे ।


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