संचारी रोग नियन्त्रण अभियान के सफल संचालन हेतु जनपदस्तरीय जनजागरुकता अभियान
आजमगढ़ 20 जुलाई-- जिला कृषि रक्षा अधिकारी सुधीर कुमार ने विशेष संचारी रोग नियन्त्रण (द्वितीय चरण) 01 जुलाई 2022 से 31 जुलाई 2022 तक शासन द्वारा निर्देशित योजना के बारे जानकारी देते हुये बताया कि इस संचारी रोग नियन्त्रण अभियान के सफल संचालन हेतु जनपदस्तरीय जनजागरुकता अभियान जनपद के 22 विकास खण्डों में क्रियान्वित किया जाता है। इसके अन्तर्गत कृषि विभाग द्वारा जनसहभागिता, जनसामान्य का सहयोग लेकर कर्मचारियों के माध्यम से अभियान का प्रचार-प्रसार और रोग संचार के कारकों से होने वाली हानियों तथा मानवीय जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से जनसमुदाय को अवगत कराते हुये आवासीय घरों एवं उनके आस-पास चूहा एवं छछून्दर नियन्त्रण अभियान चलाया जा रहा है। चूंकि संचारी रोगों के प्रसार के लिये अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछून्दर भी उत्तरदायी है, इसलिये इन रोगों की रोकथाम के लिये चूहा एवं छछून्दर का भी प्रभावी नियन्त्रण आवश्यक है। एक आंकलन के अनुसार 40 प्रतिशत बीमारी स्क्रब टाइफस के संक्रमण के कारण होती है, जिसमें चूहां एवं छछून्दर रोग वाहक का कार्य करते हैं तथा इनके आवागमन से इनके उपर लगे परजीवी झांड़ीयों में चिपक जाते है, जिससे मनुष्यों में प्रकोप की सम्भावना बनी रहती है।
उन्होंने यह भी बताया कि चूहे मुख्य रूप से 02 प्रकार के होते हैं, घरेलु एवं खेत के चुहें। घरेलू चूहों को चूहिया या मूषक कहते है, इनके नियंत्रण हेतु ब्रोमोडियोलान 0.005 प्रतिशत के बने चारें की 10 ग्रा0 मात्रा प्रत्येक जिन्दा बिल में रखने से चूहे उसको खाकर मर जाते हैं तथा खेत के चूहों में फील्ड रेट एवं फील्ड माउस प्रमुख है। चूहा बहुत चालाक प्राणी है। इसको ध्यान रखते हुये छः दिवसीय योजना बनाकर इनकों आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होने बताया कि पहले दिन आवासीय घरों एवं आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण एवं बिलों को बन्द करते हुये चिन्हित करते है। दूसरे दिन निरीक्षण कर जो बिल बन्द हो, वहां चिन्ह मिटा देते है, जहां पर बिल खुले पाये जाते हैं, वहां चिन्ह रहने देते है, खुले बिल में एक भाग सरसों का तेल एवं 48 भाग भुने हुये दाने का चारा बिना जहर मिलायें बिल में रख देते हैं। तीसरे दिन बिल का निरीक्षण कर बिना जहर का चारा फिर रखते है। चौथे दिन जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत की 1.0 ग्रा0 मात्रा को 1.0 ग्रा0 सरसों का तेल एवं 48 ग्रा0 भुने दाने में बनाये गये चारें को बिल में रख देते हैं। पांचवें दिन बिलों का निरीक्षण करें एवं मरें हुये चूहों को एकत्र कर जमीन में गाड़ देते हैं। छठवें दिन बिलों को पुनः बन्द करें तथा अगले दिन यदि बिल खुले पाये जायें तो उपरोक्त कार्यक्रम पुनः अपनायें।
-------जि0सू0का0 आजमगढ़-20.07.2022--------


























































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