व्यावसायिक अध्ययन केन्द्रों के लिए बनें नियम - ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि - वाचनालय को न कहा जाय लाइब्रेरी
सुलतानपुर। देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और बड़ी बिल्डिंग्स में भयावह आग से कई जानें गईं हैं। ऐसे में गली मुहल्लों और छोटी बाजारों में धड़ल्ले के साथ खुल रहे अध्ययन केन्द्रों को नियम कानून के दायरे में रखना जरूरी हो गया है। यह बातें राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहीं। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक कारणों से आजकल लाइब्रेरी शब्द का अर्थ ही बदल दिया गया है। जहां पुस्तकें नहीं है उसे पुस्तकालय कहा जा रहा है जबकि यह सभी वाचनालय हैं। इन्हें अध्ययन केंद्र या स्टडी रुम कहना चाहिए लाइब्रेरी नहीं। प्रशासन और समाज को मिलकर इसके लिए जागरूक होने की जरूरत है। समाजसेवी शिक्षाविद ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि वाचनालय जिन्हें आजकल लाइब्रेरी कहा जा रहा है वह बेसमेंट में संचालित न होकर हवादार और खुले स्थानों पर होने चाहिए। यहां अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र और आपातकालीन निकास अनिवार्य होना चाहिये । सभी केंद्रों का स्थानीय शिक्षा विभाग में पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिये । विद्यार्थियों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था, पंखे/कूलर, और पीने के साफ पानी की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिये । प्रत्येक विद्यार्थी के लिए न्यूनतम स्पेस और अध्ययन के लिए उचित लाइटिंग मानक पूरे होने चाहिए।
इन सबके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय समय पर इन अध्ययन केन्द्रों की जांच हो साथ में अभिभावकों को भी इन स्थानों के निरीक्षण का अधिकार मिले।
चूंकि इस समय व्यावसायिक अध्ययन केन्द्रों (जिन्हें लाइब्रेरी कहा जा रहा है ) का प्रचलन काफी बढ़ गया है इसलिए यदि हम सब इसके लिए अभी से सचेत नहीं हुये तो दिल्ली और लखनऊ की तरह भविष्य में अन्य कहीं भी घातक घटनाएं हो सकती हैं।




















































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