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श्रीमद् भागवत कथा: पूतना उद्धार से कंस के असुरों के वध तक की दिव्य लीलाओं का रसपान

घोसी । बोझी। घोसी क्षेत्र के टेघना  में आयोजित भव्य श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो रहे हैं। कथा व्यास पीठ से प्रणव कुमार चतुर्वेदी जीने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं का अत्यंत मार्मिक और जीवंत वर्णन किया।
प्रमुख प्रसंग: पूतना उद्धार और असुर वध
कथा व्यास जी ने बताया कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है।
 पूतना उद्धार:
 कंस द्वारा भेजी गई मायावी राक्षसी पूतना जब बाल कृष्ण को विषपान कराने आई, तो प्रभु ने उसके प्राण ही हर लिए और उसे भी माता की गति प्रदान की। यह प्रभु की परम कृपा का साक्षात उदाहरण है।
 असुरों का संहार 
इसके बाद कंस द्वारा भेजे गए तृणावर्त, शकटासुर, बकासुर और अघासुर जैसे तमाम भयंकर असुरों का प्रभु ने खेल-ही-खेल में वध कर ब्रजवासियों को निर्भय किया। व्यास जी ने समझाया कि ये असुर वास्तव में हमारे भीतर के अहंकार, लोभ और दुर्गुणों के प्रतीक हैं, जिन्हें केवल ईश्वर की भक्ति से ही मिटाया जा सकता है।
व्यास पीठ का भव्य सम्मान
कथा के मुख्य यजमान/आयोजक और टेघना निवासी भूपेंद्र सिंह जी ने व्यास पीठ पर विराजमान पूज्य प्रणव कुमार चतुर्वेदी जी का माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर भव्य सम्मान किया। इस दौरान पूरा माहौल "जय श्री कृष्णा" और "राधे-राधे" के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।


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