नाव पलटने से भयभीत अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना किया बन्द
आजमगढ़ के थाना रौनापार के ग्राम बेलहिया ढाले के पास पिछले सालभर से पुल न होने का नतीजा 27 सितंबर को घाघरा नदी में नाव पलटने की घटना के रूप में सामने आया। हादसे के बाद अभिभावक इस कदर सहमे हैं कि उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इससे उनकी पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह बाधित है। उधर, चार दिन पहले नाव पलटने की घटना के मद्देनजर प्रधानाध्यापक ने भी बच्चों को स्कूल आने से रोक दिया। चार दिन पहले बेलहिया ढाले के पास नाव पलटने से 10 छात्र-छात्राओं समेत 15 लोग पानी में डूब गए जिन्हें बचा लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बेलहिया पुल वर्ष 2020 की बाढ़ में पानी की तेज धारा में बह गया था। वहां दोबारा पुल न बनने से वहां नाव चलने लगी। इस रास्ते से आराजी अजगरा मगरबी, अजगरा मगरबी, झगरहवा, अजीगरा मसर्की, गलसदिया, देवारा अचल नगर, देवारागरीब दुबे, श्रीनगर सहित 10 गांवों के लगभग 10 हजार लोग आते-जाते ळैं। सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के हजारों बच्चे भी इसी रास्ते आते-जाते हैं। जब तक पुल था तब तक उन्हें आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। पुल बहने के बाद गमनागमन के लिए नाव ही एक विकल्प बचा। चूंकि नावों की संख्या बहुत अधिक नहीं है इसलिए वे ओवरलोड हो जाती हैं। सोमवार (27 सितंबर) को क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने से ही नाव पलटी। संयोग था कि सभी सवारों को बचा लिया गया। नाव पलटने की घटना के बाद से लोग भयभीत हैं। आराजी अजगरा मगरबी स्थित प्राथमिक विद्यालय की हेडमास्टर सरस्वती देवी ने बताया कि जब से नाव पलटने की घटना हुई है तबसे उस पार से आने वाले बच्चों को आने से उन्होंने मना कर दिया है। निश्चित तौर पर इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है लेकिन कोई दूसरा रास्ता नहीं है। खौफजदा छात्र-छात्राओं ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक पुल नहीं बनेगा तब तक वे पढ़ने नहीं जाएंगे। इससे उनका चाहे जितना नुकसान हो। लगभग एक वर्ष से पुल न होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके बाद भी प्रशासन की चुप्पी आश्चर्यजनक है। पुल न बनने से चीनी मिलों तक गन्ने की ढुलाई भी नहीं हो रही है।






















































Leave a comment