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स्वास्थ बचाओ, जौ,सावां, मंडुआ, कोदो, रागी, बाजरा, कंगडी खाओ...

आजमगढ़ 21 सितम्बर-- आज स्वास्थ्य सभी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि हम पैसा तो बहुत कमा रहे पर अपने शरीरिक धन को खोते जा रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण तथा अनियमित जीवन शैली इसका एक पहलू है, लेकिन इन सब से अलग भोजन वह कारक है, जो तमाम परेशानियों के बावजूद भी हमारे शरीर को मजबूत बनाए रखता है। आज हम भोजन से भी वह पोषक तत्व नही ले पा रहे जिनकी शरीर को जरूरत है। इसी वजह से हमारा शरीर दिन ब दिन कमजोर होता चला जा रहा है। इसकी वजह है कि हमारे घरों से पारंपरिक आनाज गायब होता जा रहा है। सरकार द्वारा सितम्बर माह पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। जिस अनाज को आदिवासी खाकर अपनी इम्यूनिटी मजबूत बनाये रखते हैं, वह मिलेट्स (मोटा आनाज) जैसे सावां, मंडुआ, कोदो, रागी, बाजरा, कंगडी आदि हैं। इनमें से कोदो को भारत में आदि बीज के नाम से भी जाना जाता है। इन मोटे आनाजों को गेहूं या चावल की तरह ही उपयोग किया जा सकता है। इनकी रोटी भी बनती है, इन्हें उबालकर भी खा सकते है। कोदो का उपयोग करने से हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत होती है। कुटकी प्रजनन, एनिमिया और हार्मोनल में मद्दत करता है। सावां के उपयोग से आंतरिक अंग जैसे लीवर, किडनी आदि को मजबूती प्रदान करता है। यह जानकारी आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, कोटवा, आजमगढ़ प्रथम के प्रभारी अधिकारी प्रोफेसर डीके सिंह ने दी।
केन्द्र पर पादप प्रजनन की वैज्ञानिक डॉ0 अर्चना देवी ने बताया कि मिलेट्स (मोटा अनाज) गेंहू और चावल से ज्यादा फायदेमंद हैं, क्योंकि इसमें मौजूद शुगर बाडी में 7 घंटे बाद रिलीज होती है, जबकि गेंहू और चावल में 2 घंटे बाद ही रिलीज हो जाती है, जिसके फलस्वरूप मिलेट्स खाने के बाद 5 से 6 घंटे बाद भूख का आभास होता है और शरीर को अधिक उर्जा मिलती है। इनमें फाइबर अधिक मात्रा में मौजूद होता है, जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है। केंद्र के प्रक्षेत्र पर 4 प्रकार के मिलेट्स कोदो, टांगुन, सावां और रागी किसानों को जागरूक करने हेतु लगाए गए हैं। 
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ0 रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आज के समय में महंगाई आसमान को छू रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिको ने धान की बायोफोर्टिफाइड एवं अन्य गुणवत्तायुक्त प्रजातियों का विकास किया है, जिससे हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी। काला नमक धान की प्रजाति है, जिसका नियमित सेवन करने से एलजाइमर नामक बिमारी से निजात मिलता है। इसमें जिंक और आयरन की मात्रा पाई जाती है। इसमें 11 प्रतिशत प्रोटीन भी पाया जाती है, जो सामान्य धान की अपेक्षा अधिक है। इसे मधुमेय से ग्रसित व्यक्ति भी खा सकता है। तेलंगाना सोना में ग्लाइसेमिक इन्डेक्स कम होता है, जिसकी वजह से यह प्रजाति भी मधुमेय से ग्रसित व्यक्ति भी उपयोग कर सकता है।


----जि0सू0का0 आजमगढ़-21-09-2021-----


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