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पत्रकार की स्वतंत्रता को लेकर चिंतित हुआ पत्रकार जगत


बलिया के पत्रकारों को ज़बरिया जेल भेजे जाने की घृणित घटना के ख़िलाफ़ पूरे यूपी में पत्रकारों में रोष है। 
इस बीच ग़ाज़ीपुर, मऊ, आज़मगढ़, लखनऊ के बाद अब देवरिया, बरेली, कानपुर में भी पत्रकारों ने सड़क पर निकल कर विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। 

अजीत ओझा को बलिया पुलिस ने पेपर लीक मामले में जेल भेजा है. दरअसल 30 मार्च को बलिया में बारहवीं कक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने तीन पत्रकारों दिग्विजय सिंह, मनोज कुमार गुप्ता और अजीत ओझा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इन तीनों पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगा है.

हैरानी तो इस बात की होती है कि एक तरफ तो सरकार पत्रकारों को परेशान न करने की प्रशाशन को चेतावनी देती है तो दूसरी तरफ जब प्रशाशन परेशान करता है तब सरकार चूं तक नहीं करती. ये दोहरा मापदंड क्यों है?

बलिया प्रशासन ने पत्रकारों को सरकारी काम में बाधा डालने की बाबत जेल भेजा है. तो क्या सरकारी काम में नकल कराना शामिल था? जिनका इन पत्रकारों ने खुलासा किया था. सवाल यह भी की क्या सूबे के मुखिया तक, अब तक आवाज नहीं पहुंची होगी? अगर पहुंची तो पत्रकारों को अरेस्ट करने वालों पर सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की

अंधेर नगरी चौपट राजा
टके शेर भाजी टके शेर खाजा…

इस बीच प्रदेश भर में पत्रकारों का धरना प्रदर्शन ज्ञापन का अभियान जारी है…


बलिया में पत्रकारों पर हुई कार्यवाही को लेकर बरेली में पत्रकारों ने प्रदर्शन किया और पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग की। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसएसपी बरेली को सौपा। देखें ज्ञापन-

विषय: बलिया जिला प्रशासन दुवारा पत्रकारों के उत्पीड़न के संबंध में

विनम्र निवेदन के साथ अवगत कराना है कि यूपी बोर्ड पनपत्र लीक मामले में बलिया जनपद के तीन निर्दोष पत्रकार अजीत ओझा (अमर उजाला), दिग्विजय सिंह (अमर उजाला) व मनोज गुप्ता (राष्ट्रीय सहारा) को जेल भेजा गया है। जिला प्रशासन शिक्षा विभाग ने अपनी गर्दन बचाने के लिए यह कार्रवाई की है। बलिया में यूपी बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्र लगातार आउट हो रहे थे। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को थी। आपको बताना जरूरी है कि हाईस्कूल संस्कृत विषय की परीक्षा शुरू होने के पहले ही उसकी हल कापी होने की जानकारी जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की थी, फिर भी उसी प्रश्न पत्र पर कराई गई। संस्कृत का प्रश्न पत्र आउट होने की खबर को सभी प्रमुख समाचार पत्रों आदि ने प्रकाशित प्रसारित किया था। इसी बीच, 29 मार्च की रात को इंटर अंग्रेजी का भी प्रश्न पत्र आउट हो गया। इसकी परीक्षा 30 मार्च को दूसरी पाली में होनी थी। 30 मार्च को ही अमर उजाला ने आउट प्रश्न पत्र के चित्र के साथ समाचार प्रकाशित कर दिया। समाचार प्रकाशित होने पर शासन ने संज्ञान लिया और 24 जिलों में परीक्षा रद्द कर दी। बलिया जिला प्रशासन से शासन सवाल-जवाब करने लगा।

नतीजा यह हुआ कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए जिला प्रशासन ने 30 मार्च को दोपहर 12 बजे के करीब अमर उजाला के बलिया कार्यालय से शिक्षा विभाग की बीट देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री अजीत ओझा को पुलिस से जबरदस्ती उठवा लिया और सायंकाल मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। अगले दिन अमर उजाला अखबार से जुड़े नगरा के रिपोर्टर दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय सहारा के मनोज गुप्ता को भी पुलिस ने बेवजह गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आलम यह है कि जिला प्रशासन आज तक यह नहीं बता सका है कि गिरफ्तार पत्रकारों का क्या दोष है।

हम कलमकारों की मांग है कि :

निर्दोष पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को तत्काल रिहा किया जाए। निर्दोष पत्रकारों पर दर्ज मुकदमें वापस लिए जाए।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दमन किए जाने की नियत से की गई कार्रवाई के लिए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। पेपर आउट मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आगे से कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके। जांच में जिले के पत्रकार शासन का पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।

बलिया के डीएम, एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए।

बरेली के समस्त पत्रकार


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