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प्रभु श्री राम के वन गमन की कथा श्रद्धालु हुए भावुक

देवरिया।विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान नंदना वार्ड पश्चिमी ,बरहज में चल रहे श्री राम कथा के दूसरे दिन अनंत पीठ आश्रम बरहज के कथा व्यास विनय मिश्र ने भगवान के वन गमन की कथा सुन कर श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया 

उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती महाराज दशरथ के मन में अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को अयोध्या की राजगद्दी पर अभिषेक से अभिसिंचित करना चाहते थे अपने मंत्रिमंडल में बैठकर गुरु वशिष्ट के सामने प्रभु श्री राम को राजा बनाने की बात कहा यह बात अयोध्या के राजमहल से निकलकर पूरे अयोध्या में फैल गई अयोध्यावासी नर नारी प्रसन्न हो गए और प्रभु श्री राम के राजा अभिषेक की तैयारी करने लगे घर-घर मंगल कलश सजा जाने लगे गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने मानस में लिखा कि 

सुनत राम अभिषेक सुहावा। 

बाजत गहागह अवध बंधावा।

प्रभु श्री राम को लगा कि मैं तो साधु संतों की रक्षा पृथ्वी का भार उतारने के लिए अवतार लिया हूं भगवान श्री राम के राज्याभिषेक की बात सुनकर देवताओं में खलबली मच गई देवताओं ने मां सरस्वती से कहा की मां आप किसी तरह से करके की बुद्धि बदल दीजिए ताकि राम राज्याभिषेक के बजाय राम जी का वनवास हो जाए और हम देवताओं का कार्य सिद्ध हो जाए जिनको सरस्वती ने सुनकर देवताओं को फटकार लगाई सरस्वती ने कहा कि 

उच्च निवास नीच करतूती।

देखी न सकही पराई विभूति।।

सरस्वती ने कहा कि जो सरयू का जल ग्रहण किया होगा उसकी बुद्धि में नहीं फेर सकती। देवताओं ने कहा कि उसे राज्य में मंत्र एक ऐसी दासी है जिसने कभी सरयू का निरग्रहण नहीं किया देवताओं के आग्रह पर मां सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि पलट दी और मंथरा मैं अपनी कुटिल बुद्धि से कैकयी के सामने जाकर कहा कि तुम्हें पता है चक्रवर्ती महाराज दशरथ अपने बड़े बेटे को राजगद्दी देने जा रहे हैं जिस दिन राम राजा होंगे उसे दिन आपका बेटा भरत बंदी गृह में होगा आगे मंथरा ने कहा आपके पास दो वरदान है आप चक्रवर्ती महाराज दशरथ से मांग ले पहला भरत को राजगद्दी 

और दूसरा राम को वनवास अंबा कैकयी मैं ऐसा ही किया महाराज दशरथ से उन्होंने 14 बरस के लिए राम को वनवास और भारत को राजगद्दी मांग ली।

उन्होंने आगे कहा कि 

प्रथम हि बर भरथ ही कर

टिका।

दूसर बर मांगहु करजोरी

पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी।।

तापस वेष विशेष उदासी

चौदह वर्ष राम बनबासी।।

चक्रवर्ती की न चाहते हुए भी राम को वनवास दे दिया। 

कथा के अंत में विद्यालय के संचालक अरविंद त्रिपाठी ने मानस जी की आरती कीया।

तत्पश्चात उपस्थित श्रोताओं में प्रसाद वितरित किया गया।

कथा के दौरान विद्याधर तिवारी,ओमप्रकाश तिवारी, खड़क बहादुर यादव पूर्वप्रधानाचार्य, बच्चा उपाध्याय, राम ध्यान कुशवाहा पूर्व ग्राम प्रधान, स्वामीनाथ यादव पूर्व विधायक बरहज,

रुक्मेश त्रिपाठी, रूपचंद सोनकर, नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, जयप्रकाश शास्त्री, श्याम जी मिश्रा, राधेश्याम , प्रधानाचार्य गोपाल सोनकर, कैलाश राजभर, मुन्ना सिंह, मंतोष गौड़, रत्नेश तिवारी, मानवेंद्र तिवारी ,दिपू तिवारी,मंतोष, दिनेश मणि त्रिपाठी, शिखा पांडे ,रानी यादव, रागिनी सिंह, सलोनी चौरसिया ,अर्चना वर्मा, सविता मिश्रा, अर्चना यादव ,धर्मेंद्र यादव, प्रमोद कुमार, शंभू शरण सिंह, तुलसी, कंचन, रिद्धि वर्मा, सुनीता, उपेंद्र कुशवाहा, सुदर्शन यादव,महेश पांडे सहित विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान के समस्त छात्र छात्राएं एवं नगर के गणमान्य लोग काफी संख्या में उपस्थित रहे ‌। 


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