तीन साल में तीन संस्थाएं, लक्ष्य एक: भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना- योगी
•गायत्री परिवार की शिक्षक गरिमा कार्यशाला में बोले मुख्यमंत्री, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को किया सम्मानित
लखनऊ, 4 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। देश को जातीय और सामाजिक खेमों में बंटा हुआ नहीं, बल्कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियां भारत माता और हमारे पूर्वजों के प्रति अपराध हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी में राष्ट्रीय एकता, भारतीय संस्कृति और कर्तव्यबोध की भावना मजबूत करें।
मुख्यमंत्री रविवार को राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने मां गायत्री, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्मारिका का विमोचन किया और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित किया।
1923 में गीताप्रेस, 1925 में आरएसएस और 1926 में गायत्री परिवार की स्थापना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों संस्थाओं के स्थान और कार्य करने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय समाज की चेतना को जागृत करना और सनातन मूल्यों से जोड़ना रहा है।
उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने समाज में भारत और भारतीयता का भाव जगाने के साथ युवाओं को राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विचार पर आधारित संगठन लंबी दूरी तय करता है, जबकि व्यक्ति-केंद्रित संगठन समय के साथ कमजोर पड़ सकता है।
गायत्री परिवार ने यज्ञों के माध्यम से समाज को जोड़ा
सीएम योगी ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने गायत्री परिवार के माध्यम से समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। यज्ञों की वेदी पर सर्वसमाज को एक साथ बैठाकर सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।
उन्होंने कहा कि जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और लोगों में निराशा का भाव था, उस समय पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और परंपराओं के प्रति लोगों में विश्वास जगाने का कार्य किया। वे स्वयं भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे।
विचार कभी नहीं मरते: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य संगठन का नाम अपने नाम पर रख सकते थे, लेकिन उन्होंने व्यक्ति से ऊपर परिवार और विचार को महत्व दिया। इसी कारण संगठन का नाम गायत्री परिवार रखा गया।
उन्होंने कहा कि शब्द और विचार कभी नहीं मरते। अखिल विश्व गायत्री परिवार की 100 वर्षों की यात्रा इसका प्रमाण है। संगठन को अब अगले 100 वर्षों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित करके कार्य करना चाहिए।
समाज के बिखराव को रोकने का दायित्व उठाए गायत्री परिवार
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया के सामने तनाव, संघर्ष और परिवारों के बिखराव की चुनौती है। पहले संयुक्त परिवार समाज की बड़ी ताकत हुआ करते थे। संसाधन सीमित होने के बावजूद परिवार के लोग मिलकर संकट का सामना करते थे। आज परिवार छोटे होते जा रहे हैं और सामाजिक जुड़ाव भी कमजोर हुआ है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं की भूमिका और बढ़ जाती है। समाज में बढ़ते बिखराव को रोकने और परिवार तथा सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का दायित्व ऐसी संस्थाओं को उठाना होगा।
शिक्षक समाज की चेतना और युगनिर्माता
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करें तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी।
उन्होंने भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण और चाणक्य-चंद्रगुप्त के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय भारत की श्रेष्ठ शिक्षा परंपरा के प्रतीक रहे हैं। इस परंपरा को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।
जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने वालों से सावधान रहने की जरूरत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की एकता को कमजोर करने वाली ताकतें आज भी क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। यह भारत माता और पूर्वजों के प्रति अपराध है।
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र पर संकट आता है तो शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्हें नई पीढ़ी को विभाजनकारी प्रवृत्तियों से बचाते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की दिशा में प्रेरित करना होगा।
यूपी में 2017 से अब तक 275 करोड़ पौधे लगाए गए
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधरोपण किया गया है। इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पौधों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। थर्ड पार्टी के माध्यम से पौधरोपण की रिपोर्ट तैयार कराकर जवाबदेही तय की जाती है। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ी को बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना है।
नदियां शरीर की धमनियों जैसी
योगी ने नदियों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि नदियां जीवन के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी शरीर के लिए धमनियां। स्वार्थ के कारण नदी संस्कृति को नुकसान पहुंचा है। यदि जीवनदायिनी नदियां समाप्त हुईं तो मानव जीवन के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से वर्षों पहले सूख चुकी एक नदी के पुराने स्वरूप की जानकारी प्राप्त की और उसकी खुदाई कराई। कार्य पूरा होने के बाद बारिश में वहां दोबारा जलधारा फूट पड़ी। उन्होंने कहा कि यह पूर्वजों की तपस्या को साकार करने जैसा है।
अधिकार से अधिक कर्तव्य को महत्व देने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 21 जून को 190 से अधिक देश योग से जुड़कर भारतीय ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी के शताब्दी महोत्सव के लिए हमारे संकल्प स्पष्ट हैं। गुलामी की मानसिकता को त्यागना, अपनी विरासत पर गर्व करना, सामाजिक समता के लिए कार्य करना, विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाना और नागरिक कर्तव्यों का पालन करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता। भारत दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूल सम्मानित
कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्यालयों में सीतापुर के सीतापुर इंटर कॉलेज और आशुतोष बृज मोहन लाल मेमोरियल कॉलेज, रायबरेली का चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल, लखनऊ के लखनऊ पब्लिक स्कूल और सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गाजियाबाद का डॉ. केएन मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज, अमेठी का शिव प्रताप इंटर कॉलेज, बुलंदशहर का अमर सिंह इंटर कॉलेज, चित्रकूट का चित्रकूट इंटर कॉलेज तथा मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल शामिल रहा।
नई पीढ़ी में भारतीय मूल्यों की स्थापना जरूरी: डॉ. चिन्मय पंड्या
कार्यशाला में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता आज मनुष्य के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। धर्म, न्याय, नीति, मूल्य और सदाचार को मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल भाव और मूल्यों को स्थापित करना है।
कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, केंद्रीय जोन प्रभारी परमानंद द्विवेदी, समन्वयक रामयश तिवारी सहित गायत्री परिवार के स्वयंसेवक और प्रदेशभर से आए शिक्षक मौजूद रहे।






















































Leave a comment