दिल्ली में INDIA गठबंधन की महारैली: अखिलेश यादव ने भाजपा को दी खुली चुनौती, बोले—2027 में यूपी से होगी विदाई
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में रविवार, 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित की। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इस महारैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी सहित विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
इस रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी रहा। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कहां से शुरू हुआ मार्च?
रविवार दोपहर INDIA गठबंधन के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से अपना कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद नेता खुले वाहन में सवार होकर मिंटो रोड- कनॉट प्लेस जंक्शन पहुंचे। वहां से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मार्च निकालते हुए रामलीला मैदान पहुंचे।
मार्च के दौरान कार्यकर्ता हाथों में झंडे, बैनर और तख्तियां लेकर चल रहे थे। चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। रामलीला मैदान पहुंचने के बाद नेताओं ने सभा को संबोधित किया।
कौन-कौन से बड़े नेता हुए शामिल?
इस राजनीतिक कार्यक्रम में विपक्ष के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से:
1. राहुल गांधी – नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा
2. मल्लिकार्जुन खरगे – कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष
3. सोनिया गांधी – कांग्रेस की वरिष्ठ नेता
4. प्रियंका गांधी वाड्रा – कांग्रेस महासचिव
5. अखिलेश यादव – समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
6. ममता बनर्जी – तृणमूल कांग्रेस प्रमुख
7. अभिषेक बनर्जी – तृणमूल कांग्रेस नेता
8. तेजस्वी यादव – राष्ट्रीय जनता दल के नेता
9. फारूक अब्दुल्ला – नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता
10. महबूबा मुफ्ती – पीडीपी प्रमुख
11. एमए बेबी – माकपा नेता
12. डी. राजा – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव
13. दीपंकर भट्टाचार्य – भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव
14. केसी वेणुगोपाल – कांग्रेस महासचिव
इसके अलावा INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं और विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर किया तीखा हमला
इस महारैली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भाषण खास चर्चा में रहा।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के बीच चुनाव जीतने को लेकर आशंकित है और इसलिए चुनाव आयोग के माध्यम से राजनीतिक रास्ता तलाश रही है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनाव और SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से पहले लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए।
अखिलेश ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि उस समय समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायत चुनाव आयोग से की थी। उनके अनुसार सपा कार्यकर्ताओं ने ऐसे मतदाताओं की पहचान की थी, जिन्होंने 2019 में मतदान किया था, लेकिन 2022 में उनके नाम मतदाता सूची में नहीं मिले।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत और हलफनामा भी दिया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि रामपुर में चुनाव के दौरान लोगों को मतदान से रोकने और डराने की घटनाएं हुई थीं।
2027 को लेकर अखिलेश का बड़ा बयान
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश की राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर सीधा निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग स्वागत करना भी जानते हैं और विदाई करना भी।
अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 में भाजपा और उसके सहयोगियों की ऐसी विदाई होगी कि वे दोबारा सत्ता में लौट नहीं पाएंगे।
उनका बयान था कि जो लोग कभी उत्तर प्रदेश से आए थे, वे उत्तर प्रदेश से ही जाएंगे।
उन्होंने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की लड़ाई का मैदान बताते हुए कहा कि यहां से उठने वाली आवाज देश की राजनीति में बदलाव का संदेश दे रही है।
अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे का मुद्दा भी उठाया
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि वोट चोरी, चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी करने वालों का अंत होगा।
उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि काशी की जनता ने डबल इंजन सरकार को डबल जीरो कर दिया है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा चाहती है कि केवल उसके समर्थक ही मतदाता और देश के नागरिक बने रहें।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरा
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाया जाना नागरिकों की आवाज और अभिव्यक्ति के अधिकार को प्रभावित करता है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्ष के आरोपों के आधार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, विपक्ष अपना संघर्ष जारी रखेगा।
ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव ने भी साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर समस्याएं हैं।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग प्रमुख पर भी निशाना साधा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए न्यायपालिका तथा मीडिया से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
वहीं बिहार के नेता तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में महाभारत का उल्लेख किया। उन्होंने रामलीला मैदान को लोकतंत्र का कुरुक्षेत्र बताते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया के साथ राजनीतिक खेल किया जा रहा है।
फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी लोकतंत्र, अधिकारों और देश की एकता से जुड़े मुद्दे उठाए।
विपक्ष की मांग और सरकार का पक्ष
INDIA गठबंधन की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब है।
हालांकि इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को दुरुस्त करना है। आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
भाजपा ने भी विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक नाटक बताते हुए आरोपों का विरोध किया है।
2027 के यूपी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
दिल्ली की इस महारैली में अखिलेश यादव की मौजूदगी और उनका 2027 को लेकर दिया गया बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ भाजपा उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने और सत्ता बरकरार रखने की तैयारी में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दल चुनाव आयोग, मतदाता सूची और लोकतंत्र के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
दिल्ली की इस रैली ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में SIR, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी प्रमुख रहने वाला है।
अब देखना होगा कि विपक्ष की यह एकजुटता 2027 के विधानसभा चुनाव में कितनी प्रभावी साबित होती है।





















































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