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पितृ पक्ष पर विशेष, सूतक, पातक, श्राद्ध का पूरा नियम।

देवरिया।गरुड़पुराण के अनुसार क्या घर में मृत्यु होने पर उस वर्ष श्राद्ध नहीं करना चाहिए? 
यह सबसे बड़ा भ्रम है, बहुत लोग कहते हैं - हमारे घर में इस साल मृत्यु हुई है, इस साल हम श्राद्ध नहीं करेंगे, पितृ पक्ष नहीं मनाएंगे। क्या यह सही है? गरुड़ पुराण क्या कहता है?
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने स्पष्ट कहा है - मृत्यु होने पर श्राद्ध बंद नहीं होता, पितरों का अधिकार बंद नहीं होता।
लेकिन सूतक और पातक का नियम समझना जरूरी है।
पहले समझिए - घर में मृत्यु होने पर 2 तरह का अशौच लगता है।
1.  सूतक - जन्म का सूतक घर में बच्चा पैदा हो तो 10 दिन तक सूतक लगता है।
2.  पातक - मृत्यु का पातक - घर में किसी की मृत्यु हो तो 10, 11, 12, 13 दिन तक पातक लगता है। ब्राह्मण को 10 दिन, क्षत्रिय को 11 दिन, वैश्य को 12 दिन, शूद्र को 13 दिन। कलियुग में सभी के लिए 13 दिन माना जाता है।
जब तक यह 13 दिन का पातक है, तब तक कोई पूजा, कोई श्राद्ध, कोई व्रत, कोई त्योहार नहीं कर सकते। घर का मंदिर भी बंद रहता है।
लेकिन 13 दिन के बाद क्या?
13 दिन के बाद शुद्धि होती है, 13वीं पर तेरहवीं होती है, सपिंडीकरण होता है, मृत व्यक्ति पितर बन जाता है। उसके बाद पातक खत्म, और सभी पूजा-पाठ शुरू।
अब मुख्य प्रश्न - यदि घर में मृत्यु उसी साल हुई है, और 2-3 महीने बाद पितृ पक्ष आ गया, तो क्या श्राद्ध करें या नहीं?
गरुड़ पुराण कहता है - अवश्य करें।
भगवान विष्णु कहते हैं - हे गरुड़, एक व्यक्ति के मरने से दूसरे पितरों का भोजन बंद नहीं होता। जैसे एक बेटा बीमार हो जाए तो क्या दूसरे बेटों को भोजन नहीं दोगे? वैसे ही एक नए पितर के आने से पुराने पितरों का श्राद्ध बंद नहीं करना चाहिए।
नियम क्या है?
नियम 1 - यदि मृत्यु पितृ पक्ष से पहले, 1 साल के अंदर हुई है, तो उस नए मृत व्यक्ति का श्राद्ध पितृ पक्ष में नहीं होगा, पर पुराने पितरों का श्राद्ध अवश्य होगा।
उदाहरण - मान लो आपके पिता जी का देहांत जनवरी 2026 में हुआ, और पितृ पक्ष सितंबर 2026 में है। तो सितंबर 2026 में आप अपने पिता जी का पहला पितृ पक्ष वाला श्राद्ध नहीं करेंगे। उनका पहला श्राद्ध 1 साल बाद, जब बरसी होगी, तब होगा। उस दिन सपिंडी श्राद्ध होगा, तब वे पितरों में मिलेंगे। लेकिन आपके दादा जी, परदादा जी का श्राद्ध जो हर साल करते हैं, वह सितंबर 2026 में अवश्य करेंगे, रोकेंगे नहीं।

नियम 2 - पहला वर्ष - प्रेत वर्ष।
गरुड़ पुराण कहता है - मृत्यु के बाद 1 साल तक व्यक्ति प्रेत योनि में रहता है, पितर नहीं बनता। इसीलिए पहले वर्ष उसे पितरों में नहीं मिलाते। उसके नाम से हर महीने मासिक श्राद्ध, त्रैमासिक, 6 माही, और 1 साल पर वार्षिक श्राद्ध - बरसी करते हैं। पितृ पक्ष में उसका नाम नहीं लेते, क्योंकि वह अभी पितृ पंक्ति में आया ही नहीं।
नियम 3 - यदि मृत्यु पितृ पक्ष के दौरान ही हो जाए तो क्या करें?
यदि पितृ पक्ष के 16 दिन के अंदर ही घर में किसी की मृत्यु हो जाए तो उस साल का पितृ पक्ष उसी दिन से बंद हो जाता है, पातक लग जाता है, बाकी के बचे हुए दिन का श्राद्ध नहीं कर सकते। पर जो श्राद्ध पातक से पहले कर चुके, वह मान्य है। और अगले साल से फिर नियमित शुरू।
नियम 4 - सूतक में श्राद्ध आ जाए तो क्या करें?
यदि घर में बच्चा पैदा हुआ है, और 10 दिन का सूतक है, और उसी बीच पितृ पक्ष की तिथि आ गई, तो उस तिथि का श्राद्ध सूतक खत्म होने के बाद, उसी पक्ष में कर सकते हैं, या अमावस्या को कर दें। श्राद्ध टाल सकते हैं, छोड़ नहीं सकते।
नियम 5 - क्या स्त्री की मृत्यु पर भी यही नियम?
हाँ, स्त्री, पुरुष, बच्चा, बुजुर्ग - सभी के लिए यही नियम। किसी की भी मृत्यु पर पुराने पितरों का श्राद्ध बंद नहीं होता।
बहुत लोग डरते हैं - पंडित जी कहते हैं, इस साल श्राद्ध मत करो, घर में मृत्यु हुई है। यह गलत क्यों है?
गरुड़ पुराण में भगवान कहते हैं - जो पुत्र पातक के बहाने पुराने पितरों का श्राद्ध छोड़ देता है, उसके पितर भूखे रह जाते हैं, और श्राप देते हैं - तूने हमें भूखा रखा, तेरा वंश भूखा रहेगा। इसीलिए भूल से भी पुराने पितरों का श्राद्ध मत छोड़ो।
सही विधि क्या है उस वर्ष?
- घर में मृत्यु हुई है, 13 दिन बाद शुद्धि हुई।
- अब यदि पितृ पक्ष आया तो सुबह स्नान करके, संकल्प लें - 
- मम पितृ प्रीत्यर्थम्, अहं पितृ श्राद्धं करिष्ये, नूतन प्रेतं विहाय। अर्थात नए प्रेत को छोड़कर पुराने पितरों के लिए श्राद्ध कर रहा हूँ।
- नए मृत व्यक्ति के नाम से कोई पिंड नहीं, कोई ब्राह्मण भोजन नहीं, केवल पुराने पितरों के नाम से।
- - नए मृत व्यक्ति के लिए अलग से, घर में नहीं, किसी तीर्थ में या मंदिर में मासिक श्राद्ध करते रहें।
एक विशेष बात - गया श्राद्ध, त्रिपिंडी, नारायण बली पर पातक का नियम नहीं लगता।
यदि घर में मृत्यु हुई है, और आप गया जाकर त्रिपिंडी या नारायण बली कराना चाहते हैं तो पातक खत्म होने के बाद, 13 दिन बाद कभी भी करा सकते हैं, पितृ पक्ष का इंतजार जरूरी नहीं।
सार -
-मृत्यु वाले वर्ष श्राद्ध बंद नहीं होता।- नए मृत व्यक्ति का श्राद्ध पितृ पक्ष में नहीं होता, 1 साल बाद होता है।- पुराने पितरों का श्राद्ध अवश्य होता है, हर साल होता है।- 13 दिन के पातक में कोई श्राद्ध नहीं होता- पातक के बाद श्राद्ध अवश्य होता है।
यदि आपने पातक के नाम पर श्राद्ध छोड़ दिया तो आपने अपने पितरों को भूखा मार दिया। गरुड़ पुराण कहता है - भूखा पितर सबसे बड़ा श्राप देता है।
इसीलिए हे मनुष्य, घर में मृत्यु होना प्रकृति का नियम है, पर पितरों को भोजन देना पुत्र का धर्म है, धर्म कभी बंद नहीं होता।


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