जिम्मेदार ही मस्त तो इस लापरवाही के जिम्मेदार कौन
केराकत जौनपुर।योगी सरकार 2017 के सत्ता में आने पर कई सारी योजनाओं का उद्दघाटन व शिलान्यास किया गया।उन्ही एक योजनाओं में छुट्टा गायों के लिए गौशालाओं की योजना का शिलान्यास किया गया व जिसका निर्माण कई जगह किया गया ।एक तरफ जहां अवैध कटानों पर अंकुश लगा।वहीं सड़कों पर आवारा घूमते पशुओं को संरक्षण दिलाने की मुहिम शुरू हो गई। विभाग के मुताबिक जो व्यक्ति गायों को पालने के लिए गौशाला शुरू करेगा उसे सरकार की तरफ से प्रति गाय के हिसाब से 50 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही गायों के बच्चों के लिए 25 रुपये के हिसाब से अनुदान गौशाला संचालकों को मिलता है।यदि धरातली स्तर पर देखा जाए तो यह स्थिति बड़ी उलट पुलट नजर आएगी।कई अस्थाई गौशालाओं के हालात बद से बत्तर है जैसे ग्राम पंचायत पेसारा मे अस्थाई तौर से बनाए गए गौशाला में आए दिन 2 से 4 पशु मर जाते हैं। जबकि उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा पशु विभाग संपूर्ण रुप से गायों को लेकर काफ़ी बड़े पैमाने पर गौशाला बनाने का काम किया लेकिन नवनियुक्त ग्राम प्रधान व ग्राम सेक्रेटरी व उनके द्वारा गौशाला पर न्युक्त केयर टेकर सरकार की सभी मंसाओं व योजनाओं को पतीला लगाने में जरा सा भी कोताही नहीं कर रहें है।हाल यह है कि गायों को खाने वाले चोकर, भूषा छोड़िए मुफ्त में आने वाला पानी भी नहीं दिया जा रहा है।जबकि सरकार गौशालाओं पर भारी मद खर्च कर रही है।जबकि ग्रामीण पशुधन प्रसार अधिकारी की भी न्युक्ति की गई है वह भी अपनी आंखें मूंदे हुए है।
इतनी बड़ी लापरवाही का नतीजा यही है कि ग्राम पंचायत पेसारा में बनाए गए गौशाला में आए दिन भूखे प्यासे गौवंश की दर्दनाक मौत हो रही है।पेसारा ग्राम प्रधान की इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने पर क्षेत्रवासियों में भी काफी रोष व्याप्त है।बेजुबान पशुओं की मृत्यु की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?चारा खाने वाले लोग या जिनको निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गयी है?



























































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