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मुगलकाल के सिक्कों पर भगवान राम का नाम 11 डाक टिकटों में पूरी रामायण कथा------


मऊ जनपद के दोहरीघाट में पिछले कई वर्षो से पुराने जमाने के सिक्के, डाक टिकट एंव ऐतिहासिक आटो ग्राफ्स और नष्ट होने जा रही पुरानी वस्तुओं को संरक्षण देने वाले दोहरीघाट के श्रीराम जायसवाल को कौन नहीं जाता है अपने इसी अनोखी प्रतिमा के कारण राष्टीय मुद्रा परिषद ने उन्हें मऊ जनपद का संयोजक बनाया है। उन्होंने बताया कि बचपन जो देश-विदेश के नोट व पुराने जमाने के सिक्कों तथा डाक टिकटों को इकठ्ठा करने का शौक ऐसा जगा की जो दिनोंदिन बढ़ता ही गया। आज भी जब कोई अनोखी वस्तु मिल जाती है तो अपने संग्रालय में सजाने को उत्साहित हो जाता हूं।
11 डाक टिकटों में पूरी रामायण कथा
श्रीराम जायसवाल कहते है कि 22 सितंबर 2217 को काशी के मानस मंदिर में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने रामायण कथा को समेटे 11 टिकटों को जारी किया। इन टिकटों की पूरी शीट पर रामलीला के प्रमुख दृश्य अंकित किए गए हैं। मुख्य रूप से राम-सीता स्वयंबर है। वनवास, भरत मिलाप, केवट प्रसंग, जटायु संवाद, रामसेतु निर्माण, संजीवनी बूटी लाते हुए हनुमान जी और रावण वध का चित्रण किया गया है। अंत में भगवान श्रीराम चंद्र जी के राजगद्दी पर विराजमान होने का बहुत ही अलौकिक मनोहारी दृश्य भी है। और सबसे खास बात है कि इन टिकटों में कहीं भी रावण नहीं है।
मुगलकाल के सिक्कों पर भगवान राम का नाम
श्रीराम जायसवाल के संग्रालय में मुगलकालीन सिक्के भी मौजूद है जिसमें एक सिक्का मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय जिसे अली गौहर भी कहा गया जाता था। उस सिक्के पर भगवान राम के नाम का अंकन है। इतिहासकारों के अनुसार मुगल बादशाह अकबर ने शासन के अंतिम वर्ष में सोने व चांदी की मुद्रा जारी किए जिसमें एक तरफ भगवान राम हाथ में धनुष लिए और माता सीता हाथ में पुष्प लिए है। नागरी भाषा में रामसिया अंकित किया गया है।


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