देश की EBM मशीन को लेकर नेताओं में जो असमंजस है क्या....
पहले EVM को केरल में 1982 में इस्तेमाल किया था, लेकिन तब से लेकर अब तक में इसको लेकर सबसे ज्यादा विवाद 2014-2019 के चुनावों में ही दिखा है. इतने आरोप लगे हैं कि खुद चुनाव आयोग को EVM और VVPAT को लेकर सफाई देनी पड़ी है, लेकिन फिर भी EVM को लेकर अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी से लेकर उनकी पार्टियों के कई कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी FIR या कोई लिखित शिकायत नहीं की. जब्कि सिर्फ 2 रुपए देकर पोलिंग बूथ पर ही शिकायत की जा सकती है ।
आखिर क्यों नहीं होती EVM को लेकर लिखित शिकायत?
इसे समझने के लिए लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़े ताज़ा मामले को जानना होगा. 23 अप्रैल को गुवाहाटी के पोलिंग बूथ के सामने खड़े होकर पूर्व DGP और जाने-माने लेखक हरेकृष्ण डेका ने स्थानीय मीडिया से शिकायत की कि उन्होंने किसी अन्य पार्टी को वोट दिया, लेकिन वोट दूरसे प्रत्याशी को गया और VVPAT की पर्ची में भी दूसरा नाम ही सामने आया.
डेका के अनुसार जब उन्होंने इस बात की शिकायत पोलिंग अफसर से की और पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तो उस अफसर ने कहा कि इस मामले की शिकायत 2 रुपए देकर की जा सकती है, लेकिन अगर शिकायत गलत साबित हुई तो 6 महीने की जेल या फिर फाइन या दोनों हो सकते हैं. डेका इस तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते थे. उनके पास कोई तरीका नहीं था कि वो अपने आरोप को साबित कर सकें.सवाल उठाने वाले लोगों को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं. EVM को लेकर झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्यवाई की जाती है और यही कारण है कि EVM पर आरोप तो लगते हैं, लेकिन लिखित शिकायत की चर्चा नहीं होती. यही नियम EVM की FIR पर भी लागू होता है. अगर ये झूठ साबित हुआ तो शिकायतकर्ता को दंड भुगतना पड़ सकता है


























































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