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डॉक्टर्स डे (एक जुलाई) पर विशेष कोरोना काल में जनसेवा में जुटे रहे चिकित्सक पॉज़िटिव हुये लेकिन फिर लौटे ड्यूटी पर


मऊ:हर साल एक जुलाई को प्रख्यात फिजीशियन रहे डॉ बिधान चन्द्र रॉय के जन्मदिवस को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म एक जुलाई 1882 में हुआ था और इसी दिन सन 1962 में देहांत हुआ। अपने 80 साल के जीवन में आधा जीवन चिकित्सा के क्षेत्र में समर्पित किया। एक फरवरी 1961 को उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाज़ा गया। यह दिन उन्ही के याद में और डॉक्टर को धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है ।
कोरोना काल में सबसे आगे बढ़कर डॉक्टर ही जनता के सहयोगी बने और उन्हें मुसीबत से उबारने का कार्य किया, लेकिन इस दौरान चिकित्सक भी कोरोना पॉज़िटिव हुये और ठीक होने के बाद फिर से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन भी किया। डॉक्टर्स डे पर इन सभी डॉक्टरों को कोरोना योद्धा के रूप में सम्मान दिया जा रहा है।
ऐसे ही जिले के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ आर.आर. चौहान हैं जो कि कोरोना काल में जिला अस्पताल में मरीजों के लिए अपना शुरू से अनवरत समय दे रहे हैं। इसी बीच कोरोना पॉज़िटिव के संपर्क में आने के बाद उनकी हालत खराब हो गई, उन्हें लेवल-थ्री के हॉस्पिटल पीजीआई आजमगढ़ में भर्ती करना पड़ा । 21 अप्रैल को जब डॉ आर.आर.चौहान को कुछ कोरोना संक्रमण की समस्या समझ में आई तो उन्होंने तुरंत चेकअप कराया जहां वह कोरोना पॉज़िटिव निकले। इसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उन्हें मऊ एल-2 में भर्ती कराया गया। हालत खराब होने पर वहां से आजमगढ़ एल-3 (पीजीआई) के लिए रेफर कर दिया गया जहां वह कोरोना पर विजय पाई । पाँच मई को अस्पताल से डिस्चार्ज हुए और फिर कुछ समय पश्चात ही उन्होने जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार शुरू कर दिया । आज वह दूसरों को कोरोना से लड़ने का हिम्मत और ढाढ़स बढ़ाते हुए नजर आते हैं।
ऐसे ही जनपद के दूसरे चिकित्सक डॉ ए.के. रंजन हैं 04 सितंबर 2020 को किसी मरीज के संपर्क में आने के कारण कोरोना पॉजिटिव हो गए। आनन-फानन में मेदांता में जाकर खुद को एडमिट कराया और अपना पूरा उपचार कराया । 15 सितंबर को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके कुछ दिनों के पश्चात ही वह कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पुनः जनता की सेवा में लग गए । वह कोरोना योद्धा के रूप में अपने आप को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि अगर आत्मबल मजबूत हो तो कोरोना से जीता जा सकता है।


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