राम नाम की महिमा और राम वनवास के प्रसंग को सुन भावुक हुए श्रद्धालु
देवरिया।बरहज। स्थानीय विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान में चल रहे पांच दिवसीय श्री राम कथा के आज तीसरे दिवस पर कथा व्यास और विद्वानों ने ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी बहाई। कथा सत्र की शुरुआत मुख्य कथावाचक श्री बृज राज उपाध्याय जी ने अजामिल उपाख्यान से की। उन्होंने कथा के माध्यम से राम नाम की महिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि अंत समय में अनजाने में भी नारायण का नाम लेने मात्र से महापापी अजामिल का उद्धार हो गया। कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल माध्यम है।
इसी क्रम में श्री विनय मिश्रा जी ने श्री राम वनवास की मर्मस्पर्शी कथा प्रस्तुत की। माता कैकेयी के कोपभवन जाने, राजा दशरथ के विलाप और पिता के वचनों को निभाने के लिए भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के वन गमन के प्रसंग को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
इसके पश्चात, श्री किशोरी शरण जी महाराज, श्री राजेन्द्र पाठक एवं श्रीमती नीलम गायत्री जी ने अपने मधुर भजनों और दिव्य विचारों के माध्यम से कथा को आगे बढ़ाया, जिससे संपूर्ण वातावरण राममय हो गया।
गणमान्य जनों ने किया कथा श्रवण:
इस आध्यात्मिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कथा श्रवण करने वालों में मुख्य रूप से नरेन्द्र मिश्रा 'पप्पू', ओम प्रकाश शुक्ला, अभय कुमार पाण्डेय (अध्यक्ष, अंश फाउण्डेशन ट्रस्ट), मैनेजर तिवारी, रावत जी, अरविन्द त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु एवं मातृशक्ति उपस्थित रही। आरती के बाद सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।























































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