कन्नौज में छह महीने तक फर्जी दरोगा बनकर घूमता रहा संजीव, पुलिस ने दबोचा
कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर पिछले करीब छह महीने से फर्जी उपनिरीक्षक (SI) बनकर लोगों पर पुलिसिया रौब झाड़ रहा था। आरोप है कि वह वर्दी का इस्तेमाल कर आम लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों से अवैध वसूली और ठगी करता था।
दो स्टार वाली वर्दी पहनकर बनता था दरोगा
पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी की पहचान संजीव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस के उपनिरीक्षक की तरह दिखने वाली पूरी वर्दी पहनकर घूमता था। उसके कंधे पर दो स्टार, पुलिस का लोगो और नेमप्लेट लगी होती थी।
वर्दी में देखकर लोग उसे वास्तविक पुलिसकर्मी समझ लेते थे। इसी का फायदा उठाकर वह लोगों पर दबाव बनाता और पुलिसिया भाषा व तौर-तरीकों का इस्तेमाल कर अपना काम निकालता था।
छह महीने से कर रहा था कथित ठगी
आरोपी पिछले करीब छह महीनों से कन्नौज और आसपास के इलाकों में सक्रिय बताया जा रहा है। आरोप है कि वह पुलिसकर्मी होने का झांसा देकर लोगों से रुपये वसूलता था। कुछ लोगों से काम कराने के नाम पर भी पैसे लेने की बात सामने आई है।
उसका तरीका ऐसा था कि सामने वाला उसकी वर्दी और रौब देखकर आसानी से उसकी बातों में आ जाए।
दस्तावेज मांगते ही खुल गया फर्जी दरोगे का राज
आरोपी की संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने उस पर निगरानी शुरू की। पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे तैनाती स्थल, बैच और विभागीय पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे।
बताया जा रहा है कि वह वैध पहचान पत्र अथवा पुलिस विभाग में नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ में दबाव बढ़ने पर उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह पुलिस विभाग में कार्यरत नहीं है और फर्जी दरोगा बनकर लोगों को डराता-धमकाता था।
फर्जी वर्दी और सामान बरामद
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी पुलिस वर्दी, बिल्ला और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए हैं। आरोपी के खिलाफ लोक सेवक का प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई है।
अब खुलेगा ठगी का पूरा नेटवर्क
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संजीव ने छह महीने के दौरान कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की वसूली की। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी वर्दी और अन्य सामान उसे कहां से मिले तथा इस पूरे मामले में उसका कोई साथी या गिरोह तो शामिल नहीं है।
कन्नौज में फर्जी दरोगे की गिरफ्तारी ने पुलिस व्यवस्था और आम लोगों के बीच एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ वर्दी देखकर किसी व्यक्ति को पुलिसकर्मी मान लेना कितना जोखिम भरा हो सकता है।



























































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