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फर्जी जीएसटी बिलिंग गिरोह का भंडाफोड़ रुपया 4.08 करोड़ की राजस्व चोरी का खुलासा फर्जी फर्मों के जरिए अवैध ITC लाभ दिलाने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार, कूटरचित दस्तावेजों से चल रहा था संगठित नेटवर्क

आजमगढ़। थाना सिधारी पुलिस ने फर्जी फर्मों के माध्यम से फर्जी जीएसटी बिल और ई-वे बिल बनाकर सरकार को करीब 4.08 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ दिलाने का आरोप है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में आर्थिक अपराधों एवं कर चोरी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, 8 जुलाई 2025 को दर्ज मुकदमे की विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ओटीपी प्राप्त कर फर्जी रेंट एग्रीमेंट तैयार करते थे। इनके आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था और फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर जीएसटी बिल व ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। इससे वास्तविक फर्मों को अवैध रूप से आईटीसी का लाभ मिलता था और सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचता था। रविवार को पुलिस ने बाराबंकी निवासी आनंद गुप्ता और विनय गुप्ता तथा मुरादाबाद निवासी मोहम्मद कैफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आनंद गुप्ता ने बताया कि उसके नाम पर फर्म पंजीकृत कराने के बदले उसे पांच हजार रुपये मिले थे। वहीं विनय गुप्ता विभिन्न लोगों के आधार-पैन कार्ड और ओटीपी उपलब्ध कराता था, जिसके बदले उसे प्रति व्यक्ति लगभग आठ हजार रुपये मिलते थे। मोहम्मद कैफ ने स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी फर्मों का पंजीकरण, फर्जी जीएसटी बिलिंग और अवैध आईटीसी लाभ दिलाने का कार्य करता था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। मामले में अन्य संदिग्धों और गिरोह के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।


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