पहले मोबाइल फोन से थी दूरी, अब बनी मजबूरी
जौनपुर। जिस एंड्रायड मोबाइल को किशोरों से दूर रखा जाता था, आज मजबूरीवश अभिभावक उन्हीं के हाथों में थमा रहे हैं। कोई कर्ज लेकर डाटा रीचार्ज करा रहा है तो कोई मेहनत-मजदूरी कर मोबाइल फोन खरीदने को विवश है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि अभिभावकों को अपने बच्चों के शिक्षा की चिता है। दूसरी तरफ इंटरनेट मीडिया के माध्यम से किशोर अपराध की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। एक वर्ष में दो दर्जन से अ अधिक ऐसी घटनाएं हुईं जिसका कारण मोबाइल फोन बना। कोरोनाकाल के पूर्व किशोरों के हाथ में मोबाइल फोन देने से अभिभावक झिझकते थे। फोन बच्चे लेकर स्कूल न जाएं इसके लिए अध्यापक उनकी तलाशी भी लेते थे। हिदायत देते थे कि बच्चे एंड्रायड फोन से दूर रहें। कोरोना काल के बाद आनलाइन पढ़ाई शुरू हुई। छात्र-छात्राओं को वाट्सएप ग्रुप व विभिन्न एप के माध्यम से आनलाइन शिक्षा दी जाने लगी। बच्चों की शिक्षा को लेकर अभिभावकों ने किशोरों के हाथ में मोबाइल थमा दी। ऐसे में किशोर अक्सर मोबाइल फोन में जुटे रहते हैं। कभी आनलाइन क्लास चलने की बात बताकर तो कभी कोर्स पूरा करने का बहाना बताकर अभिभावकों को संतुष्ट भी करने लगे हैं। अब किशोरों के हाथ मोबाइल देना और डाटा रीचार्ज कराना मजबूरी बन गया है।
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जौनपुर। आजादी के अमृत महोत्सव पर आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत गुरुवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन नेचुरल फार्मिंग सजीव प्रसारण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित कर प्रदेश को आर्थिक रूप से संवर्धन बनाने के दृष्टिगत किसानों को जीरो बजट की खेती हेतु प्रेरित किया गया। गुजरात प्रदेश में आयोजित संगोष्ठी को जनपद के समस्त विकासखंड में किसान लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़कर कृषि विशेषज्ञों, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं प्रधानमंत्री का उद्बोधन सुने इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उपज का डेढ़ गुना दाम देने, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भंडारण गृह, मूल्य सम्बर्धन, कोल्ड चेन, कृषि विविधीकरण आदि से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेती की चुनौतियों से निपटने के लिए रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशको के विकल्प का ध्यान रखकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गो आधारित खेती आज की एक अनिवार्य आवश्यकता हो गई है, इसमें सभी कृषि कार्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग से किए जाते हैं। प्राकृतिक खेती को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक ले जाएंगे प्राकृतिक खेती से जुड़ने से मानवता एवं इंसानियत आएगी, आत्म निर्भर भारत एवं खुशहाल किसान के लिए इसे जन आंदोलन बनाने के लिए उन्होंने किसानों से आवाहन किया। उप परियोजना निदेशक आत्मा डा. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि विकास खण्ड वार कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा द्वारा जनपद स्तरीय अधिकारियों यथा जिला कृषि अधिकारी केके सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी, गन्ना, उद्यान एवं मत्स्य आदि को पर्यवेक्षकीय अधिकारी नामित किया गया था। प्रधानमंत्री के सजीव प्रसारण में जनपद के कुल 4317 कृषको जिसमें 2672 पुरुष एवं 1645 महिला कृषकों ने प्रतिभाग कर जैविक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षित कृषक अब घर घर जाकर प्राकृतिक खेती के लिए लोगों को जागरूक करेगें। बरसठी ब्लाक के सजीव प्रसारण के मौके पर उप कृषि निदेशक जयप्रकाश, उप परियोजना निदेशक आत्मा डॉ रमेश चंद्र यादव, एडीओ एजी गिरजा शंकर वर्मा, राजीव त्रिपाठी, रमेश दूबे, अनिता, आशा देवी सहित भारी संख्या में महिला एवं पुरूष किसान उपस्थित रहे।

























































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