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चलती लेखनी अविराम कलमवीरों को मेरा प्रणाम

चलती लेखनी अविराम
कलमवीरों को मेरा प्रणाम🙏🙏
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ
नही है जिन्हे खुद का दंभ
 करते मदद अविलंब
लाचार जनों के अवलंब
खुद के सुख को छोड़ 
जन की सेवा में 
नही करते विलंब
दुनिया करती जिनके जज्बे को सलाम
कलमवीरों को मेरा प्रणाम।।🙏🙏
युद्ध में अकाल में 
भूख के सवाल में
 प्रकृति के प्रीत में 
जीवन के संगीत में 
चलती लेखनी बेलगाम
 कलम वीरों को मेरा प्रणाम🙏
बिक रहा देश हो 
या खिल रहा प्रदेश हो 
अलग-अलग धर के वेश
 खोजते सत्य निष्काम 
कलम वीरों को मेरा प्रणाम 
लूट रहा हो किसान 
पीट रहा हो जवान 
हो रही हो इज्जत नीलाम 
चलती लेखनी बेलगाम 
कलम वीरों को मेरा प्रणाम


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