मालवीय सम्मान से सम्मानित किए गए शिक्षा के शिल्पकार, आध्यात्मिक और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है बरहज- सत्येंद्र त्रिपाठी
•इतिहास के पन्नों को अध्ययन करने की आवश्यकता है- श्वेता जायसवाल
शिक्षक का स्थान गुरु से भी ऊपर होता है - आंजनेय दास जी महाराज
देवरिया।
बरहज। स्थानीय बी आरडी बी पीजी कॉलेज आश्रम के सभागार में शिक्षा जगत के मालवीय कहे जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिक्षाविद मदन मोहन मालवीय जी के नाम से मालवीय शिक्षा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
उक्त अवसर पर जनपद के विभिन्न ब्लॉकों के अवकाश प्राप्त शिक्षक गण का अंग वस्त्र और मालवीय जी का चित्र देकर के सम्मानित किया गया ।
आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के बतौर मुख्य अतिथि अध्यक्ष लोक नीति भारत पंडित सत्येंद्र त्रिपाठी ने कहा कि यह क्षेत्र शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक और विपणन का भी प्रमुख केंद्र माना जाता था ।
लेकिन समय धीरे-धीरे बदलता गया और आज के बदलते परिवेश में बढ़त क्षेत्र का कहीं न कहीं शिक्षा एवं अध्यात्म का क्षेत्र कहे जाने वाला यह क्षेत्र आज भी विकास की दौड़ में पिछड़ गया है ।
इसके लिए आवश्यक है अपने आध्यात्मिक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र आज अस्तित्व से लड़ रहा है ।
उन्होंने आगे कहा कि बरहज की धरती अनंत महाप्रभु की तपोस्थली बाबा राघव दास की कर्मभूमि और देवरहा बाबा का सिद्ध पीठ रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अनंत पीठ आश्रम के पीठाधीश्वर अंजनेय दास जी महाराज ने कहा कि इस देश की परंपरा रही है सर्वे भवंतु सुखिन के सिद्धांत पर चलकर भारत विश्व गुरु बना था ।
राष्ट्र निर्माण में गुरूजनो का विशेष योगदान है शिक्षा से ही राष्ट्र की पहचान होती है और शिक्षा की बदौलत है व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने कहा कि बरहज शिक्षा का केंद्र रहा है।
समाज को हमेशा देने का प्रयास करना चाहिए हमारा समाज के प्रति क्या दायित्व है इसके साथ ही राष्ट्र के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा ।
यह देश गुरु शिष्य परंपरा का देश है शिक्षा के उत्थान के साथ-साथ एक सशक्त भारत का निर्माण हो रहा है।
इसके साथ ही हमें इतिहास के उन पन्नों को भी अध्ययन करने की आवश्यकता है ।
महानायकों के जीवन आदर्श को अपने जीवन में उतरने की आवश्यकता है सामाजिक ज्ञान और शिक्षा के बदौलत समाज में पहचान स्थापित की जा सकती है।
इस अवसर पर श्री कृष्ण इंटर कॉलेज आश्रम बरहज के पूर्व प्राचार्य प्रेम शंकर पाठक, बी आरडी बी डी पीजी कॉलेज आश्रम बरहज के पूर्व प्राचार्य महंत कुशवाहा ,परमहंस संस्कृत महाविद्यालय प्रधानाचार्य कृष्ण मुरारी तिवारी, रामाश्रय यादव, प्यारे मोहन सोनी ,ध्रुवधर द्विवेदी, दिनेश यादव, इंद्रजीत उपाध्याय, हरिप्रसाद यादव ,दयानंद दीक्षित, श्री प्रकाश दीक्षित, आशुतोष तिवारी ,ज्ञानचंद मिश्रा, राम सिंगर पांडेय, मोतीलाल गुप्ता, सुधाकर तिवारी, वीरेंद्र दीक्षित ,श्री कृष्ण सिंह, हरिहर प्रसाद, मंगल मणि त्रिपाठी, बृजराज उपाध्याय सहित अन्य शिक्षक सम्मानित किए गए। कार्यक्रम का संचालन निशिकांत दीक्षित ने किया।























































Leave a comment