IGRS की समीक्षा में लापरवाही पर DM सख्त, अपर मुख्य अधिकारी और PO DUDA का वेतन रोकने का आदेश
आजमगढ़। जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही को लेकर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने विभागवार और तहसीलवार शिकायतों की स्थिति, निस्तारण की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं के फीडबैक की समीक्षा की।
बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका त्रिपाठी और पीओ डूडा डॉ. महेंद्र प्रसाद का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि IGRS शासन की उच्च प्राथमिकता वाला पोर्टल है। शिकायतों का निस्तारण महज पोर्टल पर आख्या अपलोड करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान कराया जाना चाहिए। अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं से स्वयं संवाद कर फीडबैक लेने और संतुष्टिपरक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा में सबसे अधिक शिकायतों वाले विभागों में राजस्व, विद्युत, पंचायती राज, ग्राम्य विकास तथा खाद्य एवं रसद विभाग शामिल रहे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को गांवों में भेजकर शिकायतों की मौके पर जांच कराने तथा नियमानुसार गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
सगड़ी, फूलपुर, सदर, बुढ़नपुर और लालगंज तहसीलों में प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की गई। संबंधित नायब तहसीलदारों को स्वयं गांवों में जाकर मामलों की जांच करने के निर्देश दिए गए।
विद्युत विभाग में बड़ी संख्या में असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने एक्सईएन विद्युत को जेईवार रिपोर्ट तैयार कर प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा करने और शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक मामले में गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा।
डीएम ने चेतावनी दी कि जिन मामलों में शिकायतकर्ता असंतुष्ट हैं, वहां संबंधित अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर समस्या का वास्तविक कारण समझें और उसका समाधान कराएं। बार-बार शिकायत वाले गांवों में विशेष ध्यान देकर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों की नियमित निगरानी करें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका निस्तारण सुनिश्चित करें। कोई भी प्रकरण डिफॉल्टर श्रेणी में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या केवल औपचारिकता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) नरेंद्र सिंह, जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनआर वर्मा, डीसी एनआरएलएम डॉ. आराधना त्रिपाठी, परियोजना निदेशक सच्चिदानंद सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।



























































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