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केवट प्रसंग की कथा सुन सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालू।

देवरिया।श्री विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान में चल रहे श्री राम कथा के चौथे दिन सायंकाल श्री राम कथा के माध्यम से केवट प्रसंग की चर्चा करते हुए पंडित विनय मिश्र ने कहा कि प्रभु श्री राम के साथ पूरी अवध की प्रजा उनके पीछे-पीछे चल रहे थे पहले दिन प्रभु ने तमसा नदी के तट पर अयोध्या वासियों के साथ रात्रि विश्राम किया जब सभी लोग सो गए तो प्रभु ने सुमंत से कहा कि सुमंत्र रथ आगे ले चलो और अब सुमंत जी रथ लेकर गंगा के किनारे पहुंचे प्रभु श्री राम ने महाराज सुमंत्र को वहां से विदा किया गोस्वामी जी ने कहा कि 
बरबस राम सुमंत पठाए।
सुरसुरी तीर आप प्रभु आए।।
और अब प्रभु श्री राम ने निषादराज केवट से गंगा पार करने के लिए नौका मांगी। 
मांगी नाव न केवट आना।
कहीं तुम्हारा मरम मै जाना।।
जी प्रभु के बारे में उनकी मां कौशल्या नहीं जान सके भाई लक्ष्मण नहीं जान सके देवता गण नहीं जान सके उसे प्रभु श्री राम के बारे में आज केवट बड़े दावे के साथ कह रहा है कि 
कहही  तुम्हारा मरम मै जाना।
यहां एक प्रश्न उठता है कि भगवान ने तो केवट से नव मांगी नाव लाने के वजाए केवट में भगवान के मर्म की चर्चा छेड़ दी।
भगवान ने केवट से पूछा कि यह बताओ मेरे बारे में क्या जानते हो तो केवट ने कहा कि प्रभु आपके चरणों में जादू है आपके चरण धूली से पाषाणवत अहिल्या जैसी पुनः अपने रूप में प्रकट हो गई आगे केवट ने कहा की प्रभु आपके जन्म के समय एक महीने तक सूर्यास्त नहीं हुआ सूर्योदय ही रहा इस रहस्य को मैं जानता हूं 

मास दिवस भा दिवस निसी मरम न जानइ कोय।
रथ समेत रवि थाकेउ
निसा कवन बिधि होई।।
केवट और प्रभु राम के संवाद के बीच लक्ष्मण जी को लगा किया केवल मीठी-मीठी बातें करेगा और प्रभु को पार नहीं उतारना चाहता है लक्ष्मण जी ने कहा भैया मुझे केवट से बात करने दीजिए प्रभु राम समझ रहे थे उनका लक्ष्मण तुम चुप रहो लक्ष्मण जी के बारे में भी केवट जानता है और प्रभु श्री राम से कहता है कि 
मोहि राम राउरि आन दशरथ शपथ सब सांची कहो।
बरू तीर मार लखन पय
जब लगि न पांव पखारियों
तब लगि न तुलसीदास नाथ कृपालु पार उतारि हूं।
केवट का मुख्य उद्देश्य था प्रभु श्री राम का पद प्रक्षालन करना और जैसे ही प्रभु श्री राम ने केवट से कहा कि केवट अब विलंब मत करो चरण धूल को केवट प्रसन्न हो गया और अपने संपूर्ण परिवार के लोगों को आवाज देकर बुला लिया और भगवान के चरण का प्रक्षालन कर एन अमृत के रूप में संपूर्ण लोगों में बांटा और फिर भगवान श्री राम लक्ष्मण एवं जानकी जी को  नाव में बैठ कर गंगा पर करने के लिए चला। 
कथा के दौरान विद्यालय के संचालक अरविंद त्रिपाठी, जय प्रकाश शास्त्री, श्याम जी मिश्रा, राधेश्याम तिवारी, प्रधानाचार्य गोपाल सोनकर ,कैलाश राजभर मानवेंद्र तिवारी ,मंतोष, दिनेश कुमार त्रिपाठी, रागिनी सिंह, सलोनी चौरसिया, अर्चना वर्मा, सविता मिश्रा ,रानी यादव, अर्चना यादव, धर्मेंद्र यादव, गणेश मिश्रा ,खड़क बहादुर यादव, बच्चा उपाध्याय, अशोक दास जी महाराज, रामनिवास उपाध्याय, अभय पांडे, सुदर्शन यादव सहित काफी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


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