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बलरामपुर में तेंदुए का आतंक: बाड़े में घुसकर 88 भेड़ों की मौत, 13 घायल

बलरामपुर। नगर पंचायत गैसड़ी के वार्ड संख्या-10 स्थित खरगौरा गांव में सोमवार की देर रात तेंदुए ने जमकर आतंक मचाया। तेंदुआ दीवार फांदकर भेड़ों से भरे बाड़े में घुस गया और वहां अफरा-तफरी मच गई। घटना में 88 भेड़ों की मौत हो गई, जबकि 13 भेड़ें गंभीर रूप से घायल बताई जा रही हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

 

जानकारी के मुताबिक, 24 अगस्त की रात करीब 2 से 3 बजे के बीच तेंदुआ खरगौरा निवासी कन्हैयालाल पाल और विजय पाल, पुत्रगण बनारसीलाल के बाड़े में घुसा। बाड़े में करीब 200 भेड़ें बंधी हुई थीं। तेंदुए के अचानक हमले से भेड़ों में भगदड़ मच गई। सुबह पशुपालक जब बाड़े में पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। बाड़े में बड़ी संख्या में भेड़ें मृत और घायल अवस्था में पड़ी थीं।

 

पीड़ित पशुपालकों के मुताबिक, उनका परिवार बेहद गरीब है और भेड़ पालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। एक ही रात में इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ितों ने गैसड़ी कोतवाली पुलिस और विकासखंड के पशु चिकित्साधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र देकर घटना की जांच और उचित मुआवजे की मांग की है।

 

ग्रामीणों में भय, पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग

 

घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग की रामपुर रेंज से क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तेंदुआ आसपास ही मौजूद है तो इंसानों और अन्य पालतू पशुओं पर भी हमला होने का खतरा बना हुआ है।

 

रामपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी भोला प्रसाद के अनुसार, घटना की सूचना के बाद वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इतनी बड़ी संख्या में भेड़ों की मौत केवल तेंदुए के सीधे हमले से ही नहीं, बल्कि उसके खौफ में हुई भगदड़ के कारण भी हो सकती है। वन विभाग की टीम घटना की स्थिति का जायजा लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।

 

वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और रात के समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

 

एक ही रात में 88 भेड़ों की मौत ने गरीब पशुपालक परिवारों की कमर तोड़ दी है। अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की कार्रवाई और पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर टिकी है।


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