जप करते समय तर्जनी का स्पर्श क्यों माना गया है वर्जित? आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी ने बताई धार्मिक मान्यता
देवरिया। सनातन धर्म में मंत्र जप के दौरान माला फेरने की विधि का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, जप करते समय तर्जनी उंगली से माला के मनकों को स्पर्श करने से बचना चाहिए। आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी के अनुसार, जप के दौरान तर्जनी को अलग रखकर अंगूठे और मध्यमा उंगली की सहायता से माला फेरने की परंपरा प्रचलित है।
धार्मिक ग्रंथ हरिभक्तिविलास के संदर्भ में यह श्लोक प्रस्तुत किया जाता है—
“तर्जनी न स्पृशेत् सूत्रं जापकाले कदाचन।
तर्जनीस्पर्शमात्रेण जपः सर्वो निरर्थकः॥”
इसका भावार्थ यह बताया जाता है कि मंत्र जप करते समय तर्जनी से माला के सूत्र या मनकों का स्पर्श नहीं करना चाहिए। पारंपरिक मान्यता में तर्जनी को निर्देश देने, आरोप लगाने और अहंकार के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इसी कारण जप के दौरान इसे माला से अलग रखने की परंपरा प्रचलित है।
कैसे फेरें जप की माला?
परंपरागत विधि के अनुसार, जप करते समय माला को दाहिने हाथ में रखकर अंगूठे और मध्यमा उंगली की सहायता से मनके आगे बढ़ाए जाते हैं। तर्जनी उंगली को माला से अलग रखा जाता है। हालांकि, विभिन्न संप्रदायों और साधना पद्धतियों में माला फेरने की विधि में कुछ अंतर भी मिलते हैं।
इस प्रकार, जप के दौरान तर्जनी का प्रयोग न करना एक पारंपरिक धार्मिक आचार है, जिसका उद्देश्य साधना में एकाग्रता, अनुशासन और श्रद्धा बनाए रखना माना जाता है।
























































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