संपादकीय: दोस्ती—वह रिश्ता जो सीमाओं, समय और स्वार्थ से परे है
"दोस्ती वह एहसास है, जिसे न खून का रिश्ता चाहिए, न कोई अनुबंध। बस विश्वास, सम्मान और साथ निभाने का जज़्बा चाहिए।"
फ्रेंडशिप डे केवल शुभकामनाओं का दिन नहीं, बल्कि उन चेहरों को याद करने का अवसर है जिन्होंने हमारी जिंदगी को बेहतर बनाया। बचपन की गलियों में खेलते दोस्त, गांव की चौपाल पर घंटों साथ बैठने वाले साथी, स्कूल-कॉलेज के हमसफर, नौकरी में मिले सहयोगी और पत्रकारिता के सफर में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले साथी—ये सभी हमारी जिंदगी की अमूल्य पूंजी हैं।
समय बदलता है, जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, दूरियां भी आ जाती हैं। कई दोस्त वर्षों तक नहीं मिलते, लेकिन जब मुलाकात होती है तो लगता है जैसे वक्त ठहर गया हो। यही सच्ची दोस्ती की पहचान है।
इतिहास और दुनिया भी ऐसी मित्रताओं से भरी पड़ी है, जिन्होंने समय की दिशा बदल दी।
महाभारत में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आज भी निस्वार्थ प्रेम और आत्मीयता का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है। एक राजा और एक निर्धन ब्राह्मण के बीच ऐसा स्नेह था जिसमें न धन का अहंकार था और न गरीबी का संकोच। सुदामा खाली हाथ नहीं, बल्कि प्रेम लेकर द्वारका पहुंचे थे और कृष्ण ने उन्हें गले लगाकर बता दिया कि सच्ची दोस्ती पद और प्रतिष्ठा से कहीं ऊपर होती है।
इतिहास में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की मित्रता केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं थी, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की मिसाल थी। तीनों ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार कर यह साबित कर दिया कि सच्चे मित्र केवल खुशियों में नहीं, बल्कि आदर्शों और संघर्षों में भी साथ खड़े रहते हैं।
विश्व इतिहास में नेल्सन मंडेला और आर्चबिशप डेसमंड टूटू का साथ भी प्रेरणादायक रहा। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष के दौरान दोनों ने आपसी विश्वास और सहयोग से मेल-मिलाप तथा शांति का संदेश दिया। उनकी मित्रता ने दुनिया को सिखाया कि दोस्ती केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति भी बन सकती है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में दोस्ती का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां प्रतिस्पर्धा के बीच सहयोग, जोखिम के बीच भरोसा और सच की लड़ाई में एक-दूसरे का साथ ही सबसे बड़ी ताकत बनता है। कैमरे के पीछे खड़े साथी हों, कलम चलाने वाले पत्रकार हों या समाज की आवाज बनने वाले मीडिया कर्मी—इन सबकी दोस्ती लोकतंत्र को मजबूत करने की नींव है।
आज सोशल मीडिया के दौर में हजारों "फ्रेंड्स" होना आसान है, लेकिन मुश्किल समय में साथ खड़े होने वाले कुछ सच्चे मित्र ही जीवन की असली दौलत होते हैं। इसलिए इस फ्रेंडशिप डे पर केवल संदेश भेजने तक सीमित न रहें। अपने बचपन के दोस्त को फोन करें, गांव के साथी का हाल पूछें, किसी बिछड़े मित्र से फिर जुड़ें और उन पत्रकार साथियों का भी आभार व्यक्त करें जिनके साथ आपने सच की राह पर सफर तय किया है।
GGS NEWS 24 परिवार की ओर से सभी पुराने, नए, बचपन, गांव, बिछड़े और पत्रकारिता जगत के साथियों को फ्रेंडशिप डे की हार्दिक शुभकामनाएं।
"दोस्ती वह दीपक है जो अंधेरे समय में भी रास्ता दिखाता है। रिश्ते जन्म से मिलते हैं, लेकिन दोस्ती जीवन की सबसे खूबसूरत कमाई होती है। इसे संभालकर रखिए, क्योंकि सच्चे दोस्त बार-बार नहीं मिलते।"- चंद्रशेखर मौर्य (ceo) GGS NEWS 24





















































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