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आषाढ़ पूर्णिमा पर सारनाथ से बोले केशव प्रसाद मौर्य, भगवान बुद्ध के संदेश आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक

•बुद्ध की करुणा, अहिंसा और शांति के संदेश को बताया मानवता का मार्गदर्शक; सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर

 

लखनऊ/वाराणसी, 29 जुलाई 2026।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर सारनाथ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा, शांति और मानव कल्याण के संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता और संघर्ष के दौर में बुद्ध के विचार मानवता को शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाते हैं।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भगवान बुद्ध की करुणा और शांति की विरासत को विश्व मंच पर नई पहचान दिला रहा है। भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार कर रहा है।

 

उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक वैश्विक सम्मान है। (ध्यान दें: इस दावे की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से सत्यापित की जानी चाहिए।)

 

उन्होंने कहा कि सारनाथ वह पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपनी पहली धम्मदेशना देकर धम्मचक्र प्रवर्तन किया था। यहीं से करुणा, सत्य, अहिंसा और मानव कल्याण का संदेश विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा। आज भी सारनाथ दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, ज्ञान और शांति का प्रमुख केंद्र है।

 

श्री मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं किसी एक देश या समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने लोगों से बुद्ध के सत्य, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मानव सेवा के संदेशों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो सहित अनेक भिक्षुगण एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।


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