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अब कोई बच्चा नहीं रहेगा पीछे, निपुण भारत मिशन का कक्षा-5 तक विस्तार

•योगी सरकार में निपुण भारत मिशन के विस्तारीकरण को मिला रोडमैप, कक्षा-5 तक तय होंगे अधिगम लक्ष्य

 

• बालवाटिका से कक्षा-5 तक मिशन का होगा विस्तार, एनसीएफ, एनसीईआरटी और PARAKH के अनुरूप विकसित होंगे कक्षावार अधिगम लक्ष्य

लखनऊ, 18 जुलाई।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा को और अधिक गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख तथा दक्षता आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप निपुण भारत मिशन के विस्तारीकरण एवं अधिगम लक्ष्य निर्धारण की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके तहत मिशन का दायरा बालवाटिका से बढ़ाकर कक्षा-5 तक किया जाएगा तथा प्रत्येक कक्षा के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

 

नई कार्ययोजना के अनुसार बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन, शिक्षकों की क्षमता वृद्धि, लर्निंग गैप की पहचान तथा सुधारात्मक शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही राज्य, जिला, विकासखंड एवं विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

 

प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार में बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप निपुण भारत मिशन का विस्तार बालवाटिका से कक्षा-5 तक किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक बच्चे की मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा निर्धारित अधिगम लक्ष्यों से पीछे न रहे। इसके लिए एनसीएफ एवं PARAKH के अनुरूप कक्षावार लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और शिक्षकों को दक्षता आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि बालवाटिका से कक्षा-5 तक सीखने की सतत श्रृंखला विकसित कर प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु और कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं दक्षताओं से सशक्त बनाया जाएगा।

 

कार्ययोजना के अनुसार कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार और कक्षावार अधिगम लक्ष्य एनसीएफ, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों तथा PARAKH के मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। इसके लिए एससीईआरटी, डायट, विशेषज्ञों एवं शिक्षकों के सहयोग से दक्षताओं का निर्धारण कर परामर्श कार्यशालाओं के माध्यम से अंतिम रूप दिया जाएगा।

 

नई व्यवस्था में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने के बजाय प्रत्येक बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यालयों में नियमित मूल्यांकन एवं फॉर्मेटिव असेसमेंट के माध्यम से बच्चों की प्रगति का आकलन होगा। जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप पाया जाएगा, उनके लिए विशेष कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

 

इसके अलावा शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षा, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, डिजिटल संसाधनों तथा दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। बालवाटिका स्तर पर स्कूल रेडीनेस, विद्यालयी पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, पढ़ने की संस्कृति विकसित करने तथा अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

 

सरकार का मानना है कि निपुण भारत मिशन के इस विस्तारीकरण से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होगा और उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित होगा।


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