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चुने गए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की उदासीनता के चलते क्षेत्र की शान रहा टडियांव कोल्ड स्टोरेज आज बना खंडहर और चोरों का अड्डा

घोसी।मऊ। घोसी ब्लाक के टडियांव स्थित कोल्ड स्टोरेज (आलू स्टोर) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस इमारत में कभी किसानों की चहल-पहल हुआ करती थी, आज वह असामाजिक तत्वों और चोरों का सुरक्षित अड्डा बनकर रह गई है। हालत यह है कि कोल्ड स्टोरेज के कीमती पार्ट को या तो चोर चोरी कर लिये या जंक लगकर खत्म के कगार पर है। *चुने गए जनप्रतिनिधियों में विकास कार्यों का श्रेय लेने की होड़ लगी है परन्तु दम तोड़ रहे क्षेत्र के दो कोल्ड स्टोरेज की बात करने वाले कोई नेता नहीं है।*
     अस्सी के दशक में बने कोल्ड स्टोरेज में जब लगती थी ट्रॉलियों और बैलगाड़ियों की लंबी कतारें लगती थी।
स्थानीय बुजुर्गों और किसानों की मानें तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन सहकारिता मंत्री बच्चा पाठक की पहल पर इस आलू स्टोर का निर्माण कराया गया था। लेकिन नब्बे के दशक के शुरूआत में ही यह बंद होने के कगार पर पहुंच गया।एक समय था जब फसल कटाई के सीजन में आलू रखने के लिए टडियांव से लेकर कोपागंज तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बैलगाड़ियों की लंबी लाइनें लगा करती थीं। इस स्टोर ने लंबे समय तक मऊ और आसपास के किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
      किसानों को इस गोदाम से थोड़ी राहत मिलती रहती थी। कुछ वर्षों पहले तक यहाँ से किसानों को समय पर डाई (DAP) और यूरिया खाद उपलब्ध हो जाती थी। लेकिन पिछले कई वर्षों से खाद का वितरण भी पूरी तरह से ठप कर दिया गया है।
  टडियांव कोल्ड स्टोरेज से खाद मिलना बंद होने के कारण अब आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों को यूरिया और डाई के लिए कोपागंज और कल्याणपुर ,घोसी की दौड़ लगानी पड़ रही है। लंबी दूरी तय करने के बाद भी कई बार किसानों को खाली हाथ ही लौटना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता से आक्रोश
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करने वाले जिले के सांसद, विधायक और स्थानीय नेता अब इस सरकारी संपत्ति और किसानों की दुर्दशा पर पूरी तरह खामोश हैं।
  सुध लेने वाला कोई नहीं न तो किसी जनप्रतिनिधि ने इसके पुनरोद्धार की आवाज उठाई और न ही प्रशासन ने इस परिसर की सुरक्षा का कोई इंतजाम किया।
  सरकारी संपत्ति की बर्बादी देखरेख के अभाव में इमारत जर्जर हो चुकी है और इसके कीमती सामानों पर चोरों का कब्जा हो चुका है।
किसान भाइयों की मांग है कि इस ऐतिहासिक सहकारिता भवन का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार किया जाए और कम से कम यहाँ खाद-बीज वितरण केंद्र को पुनः चालू किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।


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