ग्रामीण जीवन की संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज है 'बावन पत्ते' : आंजनेय दास महाराज
देवरिया।बाबा राघवदास सभागार, बी.आर.डी.बी.डी. पी.जी. कॉलेज, आश्रम बरहज में वरिष्ठ साहित्यकार एवं मनोवैज्ञानिक हरिशरण ओझा 'ओझा' की नवीन कहानी संग्रह "बावन पत्ते" का गरिमामय विमोचन समारोह आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि परमहंसाश्रम बरहज के पीठाधीश्वर परम पूज्य आंजनेय दास महाराज ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसी रचनाएँ भारतीय ग्रामीण संस्कृति, मानवीय मूल्यों तथा लोकजीवन की संवेदनाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि लेखक ने अपने अनुभवों को सहज और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत कर समाज को एक मूल्यवान कृति प्रदान की है।
समारोह की अध्यक्षता बी.आर.डी. बी.डी. पी.जी. कॉलेज, आश्रम बरहज के प्राचार्य ने की। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है। "बावन पत्ते" सामाजिक यथार्थ और मानवीय रिश्तों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. ओ.पी. शुक्ला, पूर्व विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग ने कहा कि लेखक ने ग्रामीण परिवेश, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मनोविज्ञान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से कथाओं में उकेरा है। यह पुस्तक पाठकों को जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृति सिद्ध होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित विनय मिश्र द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत अदिति राजभर ने सरस्वती वंदना तथा पूजा कुमारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय एवं साहित्यिक बना दिया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. डॉ. अजय कुमार मिश्र ने लेखक के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरिशरण ओझा की रचनाएँ समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
इस अवसर पर लेखक हरिशरण ओझा 'ओझा' ने अपनी रचनात्मक यात्रा और पुस्तक की प्रेरणा साझा करते हुए कहा कि "बावन पत्ते" की कहानियाँ समाज में घटित वास्तविक घटनाओं, लोकजीवन के अनुभवों और मानवीय संबंधों से प्रेरित हैं।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविन्द पाण्डेय ने किया। समापन में वर्षा पाण्डेय ने राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया। समारोह में महाविद्यालय के प्रो.दर्शना श्रीवास्तव, प्रो.आरती पांडेय, प्रो.सूरज प्रकाश गुप्त, डॉ.वेद प्रकाश सिंह, डॉ.विनय तिवारी, अजय बहादुर, प्रभु कुमार, ब्रजेश यादव, डॉ.विवेकानंद पाण्डेय, डॉ.अरविन्द पाण्डेय, डॉ.धनन्जय तिवारी, डॉ.मंजू यादव, डॉ.विनय तिवारी, डॉ.अविकल शर्मा, श्री उमेश, आदि शिक्षकगण, साहित्यकार, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
























































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