रूस-यूक्रेन युद्ध में मऊ के विनोद यादव की मौत, भारतीय दूतावास ने भेजे कपड़े और दस्तावेज
🟥 29 महीने बाद लौटा बेटे का सामान, अंतिम दर्शन को तरस गया पिता
मऊ/लखनऊ। बेहतर नौकरी और अधिक वेतन का सपना लेकर विदेश गए मऊ जिले के चंद्रापार गांव निवासी विनोद यादव की रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मौत हो गई। दुखद बात यह रही कि उनके परिजनों को आज तक उनका शव नहीं मिल सका। करीब 29 महीने बाद भारतीय दूतावास के माध्यम से उनके कपड़े, पहचान पत्र (आईडी कार्ड) और अन्य निजी सामान गांव पहुंचा। सामान देखते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों के अनुसार विनोद यादव को एजेंटों ने अच्छी नौकरी और अधिक वेतन का लालच देकर रूस भेजा था। वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें रूसी सेना में शामिल कर लिया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही उनका परिवार उनसे संपर्क नहीं कर सका। लंबे समय तक परिवार उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए बैठा रहा, लेकिन 29 महीने बाद भारतीय दूतावास के माध्यम से उनके निजी सामान के गांव पहुंचने से उनके निधन की दर्दनाक सच्चाई सामने आ गई।
विनोद यादव की पत्नी अनीता देवी, पुत्र आलोक तथा बेटियां शिवांगी और शिवानी उनके कपड़े और अन्य सामान देखकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन विनोद का शव जरूर आएगा और वे उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
सबसे मार्मिक बात यह रही कि विनोद के पिता भी बेटे के अंतिम दर्शन की उम्मीद में जीवनभर इंतजार करते रहे। बेटे की एक झलक पाने की आस अधूरी ही रह गई और कुछ माह पहले उनका भी निधन हो गया। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
ग्रामीणों ने भी शोक व्यक्त करते हुए सरकार से मामले में गंभीर पहल करने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार से विनोद यादव का शव भारत लाने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को भेजने वाले एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई अन्य परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न हो।





















































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