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ईमानदारी व सादगी की मिसाल थे पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव

दीदारगंज -आजमगढ़ | एक जुलाई बुधवार को मनाई जाएगी 98वीं जयंती, पैतृक आवास आंधीपुर में होगा मुख्य कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. रामनरेश यादव की 98वीं जयंती बुधवार एक जुलाई को सादगी के साथ मनाई जाएगी। मुख्य कार्यक्रम उनके पैतृक गांव आंधीपुर स्थित आवास पर सुबह आठ बजे आयोजित होगा, जहां परिजन, समर्थक और क्षेत्र के गणमान्य लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
फूलपुर तहसील क्षेत्र के आंधीपुर गांव में एक जुलाई 1928 को साधारण किसान परिवार में जन्मे रामनरेश यादव के पिता मुंशी गया प्रसाद यादव प्राथमिक विद्यालय अंबारी में शिक्षक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी अंबारी में ही हुई। आपातकाल के दौरान वे जून 1975 से फरवरी 1977 तक मीसा और डीआईआर के तहत आजमगढ़ तथा नैनी केंद्रीय जेल में निरुद्ध रहे।
1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में आजमगढ़ से कांग्रेस के दिग्गज नेता चंद्रजीत यादव को रिकॉर्ड मतों से पराजित कर संसद पहुंचे। इसके बाद 23 जून 1977 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर एटा जिले की निधौलीकला विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू किया।
अपनी ईमानदार छवि और सादगीपूर्ण जीवनशैली के कारण उन्हें पूर्वांचल का गांधी कहा जाता था। वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के करीबी सहयोगियों में भी शामिल रहे। वर्ष 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया और 7 सितंबर 2016 तक उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी निभाई। 22 नवंबर 2016 को 89 वर्ष की आयु में लखनऊ स्थित पीजीआई में उनका निधन हो गया।
उनके छोटे भाई डॉ. सुरेश यादव ने बताया कि बुधवार सुबह आठ बजे पैतृक आवास पर सादगी के साथ जयंती समारोह आयोजित कर नेताजी स्व 0रामनरेश यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।


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