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निबंधन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में रजिस्ट्री कार्यालय घोसी तहसील में विशाल धरना-प्रदर्शन, अधिवक्ताओं का मिला भारी समर्थन

घोसी।मऊ।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री कार्यालयों को पी पी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने के निर्णय के विरोध में मंगलवार को घोसी तहसील परिसर में डीड राइटरों (दस्तावेज़ लेखकों), मोहर्रिरों और स्टांप वेंडरों ने कामकाज ठप कर विशाल धरना-प्रदर्शन किया। साथ ही तालाबंदी कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इसे वापस लेने की मांग की।
नए नियम को लेकर डीड राइटरों और स्टांप वेंडरों में भारी आक्रोश:
 विशाल धरना-प्रदर्शन डीड राइटर एसोसिएशन के अध्यक्ष मारकंडेय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालयों का निजीकरण या पी पी मॉडल पर दिया जाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे न केवल आम जनता का शोषण बढ़ेगा, बल्कि सालों से इस पेशे से जुड़े हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
 तहसील बार और डिस्ट्रिक्ट बार का मिला खुला समर्थन:
 आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब घोसी तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने भी धरने में शामिल होकर अपना पूर्ण समर्थन घोषित किया। आंदोलन के समर्थन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे:
 दिनेश राय (अध्यक्ष, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन मऊ)
 जय हिंद सिंह (मंत्री, घोसी तहसील बार)
 विपुल राय (उपाध्यक्ष, घोसी तहसील बार)
 शमशाद (वरिष्ठ अधिवक्ता)
इसके साथ ही दिवाकर, दिनेश सिंह, राजेश, असलम, अमीनुलइस्लाम सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और दस्तावेज़ लेखकों ने पी पी मॉडल के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की।
वक्ताओं ने कहा आर-पार की होगी लड़ाई
डिस्ट्रिक्ट बार के अध्यक्ष दिनेश राय और वरिष्ठ अधिवक्ता शमशाद ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार का यह कदम पूरी तरह से जनविरोधी है। रजिस्ट्री जैसी महत्वपूर्ण और गोपनीय व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपना न्यायसंगत नहीं है। तहसील बार के मंत्री जय हिंद सिंह और उपाध्यक्ष विपुल राय, सतीश पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस काले फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन तहसील स्तर से उठकर जिला और प्रदेश स्तर तक फैलेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धरना प्रदर्शन के अंत में राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन भी प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया।


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