चित्रकूट आज डूब रहा है, और यह सिर्फ बाढ़ नहीं, एक चेतावनी है। चित्रकूट
चित्रकूट । कल तक जिस रामघाट पर आरती के दीये जलते थे, आज वहां 30 फीट उफनती मंदाकिनी बह रही है। धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि 90 साल के बुजुर्ग भी कह रहे हैं ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी।
शुक्रवार रात से शुरू हुई बारिश ने शनिवार दोपहर तक सब कुछ बदल दिया। रामघाट पर मंदाकिनी का खतरे का निशान 126.50 मीटर है, लेकिन आज दोपहर जलस्तर 134.900 मीटर तक पहुंच गया। यानी खतरे से 8 मीटर से भी ज्यादा ऊपर। यह 2003 की सबसे बड़ी बाढ़ का रिकॉर्ड भी तोड़ चुका है।
रामघाट पूरी तरह जलमग्न है, 300 मीटर लंबा पुल बाढ़ में बह गया है। गोरगी बांध टूट गया है, टिकरिया डोंडा बांध खतरे में है और चार गांव खाली कराए गए हैं। शरभंग नदी के उफान से मुंबई हावड़ा रेल रूट ठप हो गया है और एक दर्जन ट्रेनें रोकी गई हैं। यूपी एमपी का संपर्क टूट गया है, चित्रकूट सतना मार्ग बंद है और सड़कों पर नावें चल रही हैं। सीतापुर, पुरानी लंका, आरोग्यधाम, तरौंहा, कटरा गूदर में चारों तरफ पानी ही पानी है। दुकानें, आश्रम, होटल, तुलसी पीठ, दीनदयाल शोध संस्थान सब डूबे हैं। लोग छतों पर शरण लिए हैं।
हर साल मंदाकिनी उफनती है। हर साल रामघाट की दुकानों में पानी घुसता है और हम उसे सावन का उफान कहकर टाल देते हैं। लेकिन इस बार की बाढ़ ने सिस्टम की पोल खोल दी है। पहाड़ों में अंधाधुंध कटान, नदी के कैचमेंट में अतिक्रमण और छोटे छोटे बांधों की अनदेखी, गोरगी जैसा बांध अगर टूटता है तो यह सिर्फ बारिश की नाकामी नहीं, रखरखाव की नाकामी है।
प्रशासन ने एनडीआरएफ बुला ली है, दो हेलीकॉप्टरों से हवाई सर्वे हो रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन क्या बाढ़ के बाद हम फिर भूल जाएंगे कि मंदाकिनी सिर्फ नदी नहीं, चित्रकूट की जीवन रेखा है। चित्रकूट में बाढ़ सिर्फ पानी का संकट नहीं, आस्था, रोजगार और दो राज्यों के संपर्क का संकट है। जरूरत है कि इस विनाशकारी बाढ़ को आपदा मानकर नहीं, एक स्थायी सबक मानकर मास्टर प्लान बनाया जाए, वरना हर भादों में मंदाकिनी हमें इसी तरह अपना 23 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर डराती रहेगी।























































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