शिक्षा जगत की अनमोल विरासत के शिल्पकार: डॉ. रणजीत सिंह का 71वाँ जन्मदिवस और शिक्षा-जगत के लिए उनका प्रेरक जीवन— रामनरेश प्रजापति
- पत्रकार, गोल्ड मेडलिस्ट जनसंचार एवं पत्रकारिता वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर उत्तर-प्रदेश।
"बनाया है मैंने ये घर धीरे-धीरे,
खुले मेरे ख्वाबों के पर धीरे-धीरे।
किसी को गिराया न, खुद को उछाला,
कटा जिंदगी का सफर धीरे-धीरे।
जहाँ लोग पहुँचे छलाँगें लगाकर,
वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे-धीरे।"
ये पंक्तियाँ श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, समोधपुर के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. रणजीत सिंह के जीवन-दर्शन का सटीक परिचय हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन इस बात का उदाहरण है कि स्थायी उपलब्धियाँ किसी त्वरित सफलता का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर कर्म की साधना से निर्मित होती हैं। 71वें जन्मदिवस के अवसर पर उनका जीवन केवल एक शिक्षक की यात्रा नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण की प्रेरक गाथा के रूप में सामने आता है। वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रणजीत सिंह ने शिक्षण को केवल आजीविका नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का दायित्व माना। सन् 1989 से जुलाई 2020 तक 31 वर्ष 4 माह के प्रधानाचार्य कार्यकाल में उन्होंने गांधी स्मारक इंटर कॉलेज को अनुशासन, गुणवत्ता और उत्कृष्टता की ऐसी पहचान दी, जो आज भी पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है।
श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज की स्थापना संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाने, सामाजिक चेतना विकसित करने और नई पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। डॉ. रणजीत सिंह ने इस परिकल्पना को व्यवहार में उतारा। उन्होंने विद्यालय को केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे संस्कार, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व का केंद्र बनाया।
उनका स्पष्ट विश्वास था कि किसी भी विद्यालय की प्रतिष्ठा छात्र संख्या से नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों की उपलब्धियों से तय होती है। इसी सोच के कारण उनके कार्यकाल में नकलविहीन परीक्षा व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित अध्ययन और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम विद्यालय की पहचान बने। उन्होंने हमेशा 'क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी' को प्राथमिकता दी।
उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ खेल, स्काउट एवं गाइड, विज्ञान, नवाचार और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं। बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों ने जनपद की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया। स्काउट एवं गाइड में विद्यालय ने राज्य स्तरीय चैंपियनशिप हासिल की, राष्ट्रीय जंबूरी में प्रतिभाग किया तथा दो राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त स्काउट एवं गाइड के क्षेत्र में 700 से अधिक राज्य पुरस्कार प्राप्त हुए। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में विद्यालय लगातार मंडल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करता रहा।
विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में भी विद्यालय ने विशिष्ट पहचान बनाई। उस समय जनपद की एकमात्र अटल टिंकरिंग लैब थी जिसने विद्यार्थियों को रोबोटिक्स और वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने का अवसर दिया। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के अंतर्गत जौनपुर के नेहरू बालोद्यान इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने विद्यालय के प्रतिभागी छात्र-छात्राओं से संवाद किया। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण थी कि ग्रामीण परिवेश का यह विद्यालय राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक सोच से जुड़ चुका था।
किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी उसके विद्यार्थी होते हैं। गांधी स्मारक इंटर कॉलेज के पूर्व छात्र आज भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), राज्य प्रशासनिक सेवा (PCS), न्यायिक सेवा, राजनीति, पत्रकारिता, चिकित्सा, कृषि, अंतरिक्ष विज्ञान, उच्च शिक्षा, कला और संगीत सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC), राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में वैज्ञानिक, प्रोफेसर और वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी इस संस्थान की गुणवत्ता का परिचय देते हैं।
डॉ. रणजीत सिंह की सबसे बड़ी विशेषता उनका संतुलित और समन्वयकारी नेतृत्व था। उन्होंने प्रबंधन समिति, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच विश्वास का ऐसा वातावरण बनाया, जिससे विद्यालय एक परिवार की तरह संचालित हुआ। कठोर अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनशीलता और न्यायप्रियता उनके व्यक्तित्व की पहचान रही। यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी विद्यार्थी उन्हें अपना प्रधानाचार्य और गुरु मानते हैं।
आज जब शिक्षा के क्षेत्र में व्यावसायीकरण, दिखावा, पश्चिमी जीवनशैली की अंधी दौड़ और अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव चिंता का विषय है, तब डॉ. रणजीत सिंह का कार्यकाल मूल्यपरक शिक्षा का आदर्श प्रस्तुत करता है। उनके नेतृत्व में विद्यालय शिक्षा को सेवा, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम मानते हुए अनावश्यक आडंबर और आर्थिक बोझ से दूर रहा। यही कारण है कि यह संस्थान समाज के विश्वास का केंद्र बना और पूरे क्षेत्र के लिए अनुकरणीय उदाहरण स्थापित कर सका।
आज संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह की परिकल्पना को आगे बढ़ाने का दायित्व गांधी स्मारक विद्यालय संकुल के वर्तमान प्रबंधक हृदय प्रसाद सिंह 'रानू' निभा रहे हैं। किसी भी संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके भवनों में नहीं, बल्कि उसकी कार्यसंस्कृति, मूल्यों और परंपराओं की निरंतरता में होती है। यदि यह विरासत सुरक्षित रहती है तो संस्थान निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करता है।
प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री प्रो. रामदरश मिश्र की पंक्तियाँ डॉ. रणजीत सिंह के व्यक्तित्व पर पूरी तरह सार्थक प्रतीत होती हैं—
"जहाँ आप पहुँचे छलाँगें लगाकर,
वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे-धीरे।"
वास्तव में, उन्होंने सिद्ध किया कि महान संस्थाएँ संयोग से नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, मूल्यनिष्ठ नेतृत्व और निरंतर परिश्रम से निर्मित होती हैं। श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, समोधपुर की वर्तमान प्रतिष्ठा उसी साधना का परिणाम है।
71वें जन्मदिवस के अवसर पर डॉ. रणजीत सिंह के स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण, उनका अनुशासित नेतृत्व और उनके द्वारा स्थापित आदर्श आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे। यही उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का सबसे बड़ा सम्मान होगा।




























































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