इलाहाबाद हाईकोर्ट से इनामी भोले राजभर को 60 दिन की राहत, FIR रद्द करने से इनकार
• आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड: 60 दिनों में सरेंडर का निर्देश, तब तक गिरफ्तारी पर रोक
जौनपुर/खेतासराय। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के चर्चित आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड में नामजद एक लाख रुपये के इनामी आरोपी भोले राजभर को सीमित अवधि के लिए राहत प्रदान की है। अदालत ने आरोपी को 60 दिनों के भीतर संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश देते हुए इस अवधि तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द (क्वैश) करने की मांग स्वीकार नहीं की।
क्या है मामला?
खेतासराय थाना क्षेत्र में 2 मई 2026 को चर्चित आजाद बिंद दूल्हा हत्याकांड के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भोले राजभर को नामजद आरोपी बनाया था। घटना के बाद से वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर निरस्त करने और पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसे साजिश के तहत झूठा फंसाया गया है और वह निर्दोष है, इसलिए एफआईआर को निरस्त किया जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और वह एक लाख रुपये का इनामी अपराधी है, इसलिए उसे किसी प्रकार की राहत नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सारण की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला एफआईआर निरस्त करने योग्य नहीं है। अदालत ने एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी, लेकिन आरोपी को कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देते हुए 60 दिनों की अंतरिम राहत प्रदान की।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि भोले राजभर पहले से गिरफ्तार नहीं है, तो अगले 60 दिनों तक उसे इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस अवधि के भीतर उसे संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर नियमित अथवा अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना होगा, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
समय सीमा के बाद समाप्त होगी राहत
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी निर्धारित 60 दिनों के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसे दी गई अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी। इसके बाद पुलिस उसके विरुद्ध कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
























































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