भक्त प्रहलाद और ध्रुव की अद्भुत कथा का कराया रसपान पंडित रमाशंकर शास्त्री
देवरिया।स्थानीय बरहज नगर में दुर्गा मंदिर के समीप सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा नगर के प्रतिष्ठित राजेंद्र प्रसाद जायसवाल के निज निवास पर प्रारंभ हुआ अवध धाम से पधारे हुए भागवत कथा व्यास पंडित रमाशंकर शास्त्री जी महाराज द्वारा कथा के तिसरे दिन श्रीमद् भागवत में ध्रुव एवं भक्त प्रहलाद की चर्चा करते हुए कहा कि ध्रुव की चर्चा करते हुए कहा कि मनोर जासौ अयतौ सुख च मनु की संतान होने के कारण हम मननशील चिंतनशील मानव मनुष्य उन्हें मनु की संतानों में उत्तानपाद हुए थे संस्कृत भाषा की सुंदरता है कि शब्द में ही उनके जीवन की प्रक्रिया वैसे भर दी जाती है जैसे छोटे से पीपल के बीच में विशाल वृक्ष उत्तानपाद शब्द का अर्थ है जिनका पर उठा हुआ हो यानी जीवन में संघर्ष की लड़ाई में उनका पर उठ चुका है और अब वह गिरेंगे गिरते कब है जब आपका भीतर का दुश्मन बलवान हो जाता है जब आप भीतर से टूट जाते हैं तो जीवन में पराजित हो जाते हैं बड़े मनोवैज्ञानिक है भागवत की कथाएं उत्तानपाद की दो पत्नी यह सुनीति और सुरुचि सुरुचि के पुत्र का नाम ध्रुव रखा गया तथा सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम। राजा की आ सकती नींद से कम और रुचि से अधिक थी इसलिए उनका नाम उत्तानपाद ध्रुव उत्तम से बड़े थे ध्रुव भगवान की भक्ति में तल्लीन रहते थे जिसके वजह से भगवान ने उन्हें दर्शन देकर धन्य कर दिया आगे उन्होंने भक्त प्रहलाद की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान विष्णु कार्टून भक्ति और उनकी रक्षा का प्रतीक है असुर कल में जन्मे प्रहलाद अपने पिता हिरण्याकश्यपु के अत्याचारों के बावजूद भगवान नारायण के परम भक्त बने रहे यह कथा सत्य की जीत और बुराई के अंत का सबसे बड़ा उदाहरण है प्रहलाद अपनी माता के गर्भ में रहते हुए है देवर्षि नारद के उपदेशों से भगवान विष्णु के अनन्य भक्त बन गए थे जिससे उनके पिता रन
हिरयाकश्यपु भक्त प्रहलाद से हमेशा क्रोधित रहता था उसने प्रहलाद को भक्ति छोड़ने के लिए कहा न मानने पर प्रहलाद को करने के लिए अपनी बहन होलिका को दिया लेकिन प्रहलाद नारायण का जाप करते रहे होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बस निकले प्रहलाद के पिता ने प्रहलाद को खंबे में बांधकर कहा कि तुम्हारा भगवान कहां है प्रह्लाद ने कहा कि भगवान इस खंबे के अंदर है जैसे ही पिता ने प्रहलाद को करने के लिए उद्यत हुआ खंबे को फाड़ कर भगवान नरसिंह के रूप में प्रकट होकर हिरण्यकश्यपु का बध कर दिया।
श्रीमद् भागवत कथा हम सभी को यही सिखाती है कि सच्ची भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने वाले की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।
कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र प्रसाद जायसवाल पत्नी आरती जयसवाल ने वैदिक मंत्रों के बीच श्रीमद्भागवत जी का पूजन किया ।ततपश्चात कथा प्रारंभ हुई कथा के दौरान अनूप जायसवाल ,अमित जायसवाल, किशन जयसवाल, गोपाल जी जायसवाल, राजेश जायसवाल, प्रेमचंद जयसवाल ,ईश्वर चंद्र ,बजरंगी, तारकेश्वर , रामकेश्वर , बृजेश , उमंग , कपूर चंद्र , सुनील , अनिल ,अमर, विजय कुमार ,आनंद कुमार , रामेश्वर यादव रमेश तिवारी अनजान, अजीत जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, डॉक्टर ओम प्रकाश शुक्ला, डॉक्टर अजय कुमार मिश्रा, मुरारी अग्रवाल भाजपा नेता अमित जायसवाल , अमरजीत सोनकर विजय सिंह रिंकू, विवेक गुप्ता सहित नगर के अन्य श्रद्धालु भक्तजन काफी संख्या में उपस्थित रहे।

























































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